मुख्य सामग्री पर जाएं
मुख्यमंत्रीमुख्यमंत्री
महाराष्ट्रमहाराष्ट्र

किसानों को राहत देने के लिए विधायक सुधीर मुनगंटीवार की मांग

सूखे और फसल बर्बादी से जूझ रहे किसानों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें, इसके लिए विधायक सुधीर मुनगंटीवार ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखा है। उन्होंने हर सोमवार को सभी विभागों के अधिकारियों वाला ‘किसान सहायता कक्ष’ शुरू करने की मांग की है।

· · 2 मिनट में पढ़ें
विधायक सुधीर मुनगंटीवार, सूखे में किसानों के लिए सहायता कक्ष की मांग करते हुए

सूखे और फसल खराबी के संकट में फंसे अन्नदाता को सरकारी दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें और उसकी समस्याएं एक ही छत के नीचे सुलझें, इसके लिए विधायक सुधीर मुनगंटीवार आगे आए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर जिले के सभी तहसील कार्यालयों और जिलाधिकारी कार्यालय में हर सोमवार को विशेष ‘किसान सहायता कक्ष’ शुरू करने की जोरदार मांग की है।

सभी विभागों की मदद एक ही छत के नीचे मौजूदा सूखे जैसी स्थिति के कारण किसान आर्थिक और मानसिक संकट में हैं। ऐसे समय में उन्हें अलग-अलग समस्याओं के लिए सरकारी दफ्तरों में भागदौड़ करनी पड़ती है: फसल नुकसान की भरपाई और फसल बीमा आर्थिक मदद और कर्ज संबंधी दिक्कतें पानी की कमी, और पशुओं के लिए चारे-पानी की व्यवस्था विभिन्न सरकारी कृषि योजनाओं का लाभ

इन सभी कामों के लिए किसानों को अलग-अलग विभागों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। अक्सर संबंधित अधिकारी एक ही समय पर मौके पर मौजूद नहीं होते, जिससे किसानों का समय, पैसा और मानसिक ताकत बर्बाद होती है। यह परेशानी रोकने के लिए मुनगंटीवार ने जोर दिया है कि सभी संबंधित विभागों के जिम्मेदार अधिकारी सहायता कक्ष में एक ही जगह मौजूद रहें।

ग्रामीण इलाकों के किसानों के लिए तहसील स्तर पर भी व्यवस्था ग्रामीण और दुर्गम इलाकों के किसानों के लिए हर बार जिला मुख्यालय आना आर्थिक और समय, दोनों दृष्टि से महंगा और मुश्किल होता है। इसलिए पत्र में सुझाव दिया गया है कि तहसील स्तर पर भी हर सोमवार को ऐसा ही कक्ष चलाया जाए। इसमें तहसीलदार के सहायक तथा कृषि, राजस्व, मदद व पुनर्वसन समेत अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी खुद मौजूद रहें, ऐसी पुख्ता व्यवस्था के निर्देश देने का अनुरोध भी उन्होंने किया है।

शिकायतों का दर्ज होना और लंबित मामलों का पीछा इस सहायता कक्ष का काम सिर्फ आवेदन लेने तक सीमित न रहकर असल समाधान देने वाला होना चाहिए, इस पर जोर दिया गया है:

तत्काल दर्ज करना और कार्रवाई: सहायता कक्ष में आने वाले सभी आवेदनों और शिकायतों का व्यवस्थित रिकॉर्ड रखा जाए और संबंधित विभाग समय पर उन पर कार्रवाई करें।

किसानों को सीधी जानकारी: लंबित मामलों की हर हफ्ते नियमित समीक्षा हो और उनकी मौजूदा स्थिति संबंधित किसान को बताई जाए।

बार-बार चक्कर लगाने की जरूरत नहीं: इस व्यवस्था से आवेदन की स्थिति जानने के लिए किसानों को बार-बार दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।

सूखे के इस कठिन दौर में किसानों तक समय पर सरकारी योजनाएं और मदद पहुंचाने के लिए प्रशासनिक विभागों में तालमेल जरूरी है, यह बात मुनगंटीवार ने रेखांकित की है।