नई दिल्ली : लद्दाख को "लोकतंत्र से वंचित" रखा जा रहा है और "विवादित इलाके" की तरह देखा जा रहा है, यह आरोप कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने गुरुवार को लगाया।
गृह मंत्रालय की लद्दाख नेताओं के साथ गुरुवार को तय बैठक नहीं हुई। इसकी कोई वजह नहीं बताई गई, ऐसा वांगचुक ने कहा।
"22 अक्टूबर को दिल्ली में मिलेंगे, ऐसा हमें पूरे यकीन से बताया गया था। हमने तैयारी की, टिकट कटाए। आज मैं यहां हूं, लेकिन बैठक नहीं हो रही। लद्दाख की उम्मीदें बार-बार कैसे तोड़ी गईं, यह देश को पता होना चाहिए," उन्होंने कहा।
2019 से लद्दाख एक विधानसभा रहित केंद्रशासित प्रदेश है, जहां उपराज्यपाल प्रशासन चलाते हैं। 24 सितंबर 2025 को लेह में हिंसा और गिरफ्तारियों के बाद गृह मंत्रालय से बातचीत फिर शुरू हुई। वांगचुक ने बताया कि उन्होंने जोधपुर की जेल में छह महीने बिताए।
लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस राज्य का दर्जा या, वह न मिलने पर विधानमंडल और संवैधानिक सुरक्षा वाला केंद्रशासित प्रदेश मांग रहे हैं।
इस साल सरकार और केंद्रशासित प्रदेश के नेताओं के बीच तीन दौर की बातचीत हुई है। 22 अक्टूबर की बैठक क्यों रद्द हुई, सरकार ने यह सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं किया है।
2019 में लद्दाख का विशेष दर्जा खत्म कर इसे केंद्रशासित प्रदेश बनाए जाने के बाद से यहां की राजनीतिक मांगें जारी हैं। लेह में हिंसा के बाद लद्दाख के राजनीतिक भविष्य पर बहस फिर राष्ट्रीय स्तर पर आई। पिछले एक साल में इस मुद्दे पर कई बैठकें हुईं, लेकिन कोई ठोस फैसला नहीं निकला।
राज्य का दर्जा न मिलने पर विधानमंडल और संवैधानिक सुरक्षा वाला केंद्रशासित प्रदेश एक मध्य रास्ता है, ऐसा ये संगठन कहते हैं। स्थानीय नेताओं का कहना है कि लोगों की समस्याएं हल करने के लिए फैसले की प्रक्रिया में स्थानीय लोगों की भागीदारी जरूरी है। वांगचुक पहले भी लद्दाख की मांगों के लिए दिल्ली में प्रदर्शन कर चुके हैं।