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SIR में 10 करोड़ वोटर छाने गए, 'विदेशी' मिले सिर्फ 1,600 — कांग्रेस ने CEC हटाने की मांग दोहराई

कांग्रेस ने गुरुवार को चुनावी नामावली की विशेष गहन समीक्षा (SIR) को प्रधानमंत्री और गृह मंत्री की साजिश बताया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग की। जयराम रमेश के मुताबिक छह राज्यों में करीब 10 करोड़ लोगों की छंटनी के बाद सिर्फ 1,600 संदिग्ध विदेशी नागरिक मिले। चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में 248 पन्नों के हलफनामे में प्रक्रिया का बचाव किया है।

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नई दिल्ली: कांग्रेस ने गुरुवार को चुनावी नामावली की विशेष गहन समीक्षा (SIR) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की साजिश बताया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग दोहराई।

पार्टी के संचार प्रभारी महासचिव जयराम रमेश ने आंकड़ा सामने रखा। जिन छह राज्यों में यह प्रक्रिया पूरी हो चुकी है या चल रही है — कर्नाटक, झारखंड, मेघालय, केरल, गोवा और मिजोरम — वहां कम से कम 1,600 संदिग्ध विदेशी नागरिक चिह्नित हुए हैं। रमेश ने यह जानकारी रिपोर्टों के हवाले से दी। इन राज्यों में करीब 10 करोड़ लोगों का SIR हुआ।

अकेले कर्नाटक में 99.7 लाख नाम हटे और 716 विदेशी नागरिक पहचाने गए, जिनमें 545 नेपाल के थे, उन्होंने बताया। एक्स पर उनका सवाल था, "इन राज्यों में करीब 10 करोड़ लोगों का SIR हुआ — ताकि 1,600 'विदेशी' मिल सकें।"

रमेश ने यह भी कहा कि बाकी 20 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों ने ऐसे आंकड़े नहीं दिए, क्योंकि चुनाव आयोग ने यह जानकारी मांगी ही नहीं। उन्होंने गृह मंत्री पर झूठ बोलने का आरोप लगाया। "ज्ञानेश कुमार को जाना होगा। SIR को रोकना होगा। ECINET को दुरुस्त करना होगा," उन्होंने तीन मांगें गिनाईं।

चुनाव आयोग ने प्रक्रिया का बचाव किया है। सुप्रीम कोर्ट में दिए 248 पन्नों के हलफनामे में आयोग ने कहा कि SIR कानून से जायज है, उसके सभी आदेश तीनों सदस्यों की सर्वसम्मति से पास हुए, और फॉर्म 6 में कोई बदलाव नहीं किया गया। सिर्फ उसके साथ जुड़े अतिरिक्त घोषणापत्र में "मैपिंग" जोड़ी गई।

आयोग के भीतर का मतभेद अब रिकॉर्ड पर है। रिपोर्टों के मुताबिक चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार आपत्ति दर्ज कराई, ज्यादातर SIR को लेकर। आयोग का कहना है कि किसी भी संस्था में अलग-अलग राय आम बात है और उसके आदेशों को पूरा कानूनी संरक्षण हासिल है।

बुधवार को दिल्ली SIR के खिलाफ याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उसने अभी तय नहीं किया है कि "लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी" हटाने का वैध आधार है या नहीं, और बिहार का फैसला इस सवाल को तय नहीं करता। कोर्ट ने आयोग से कहा कि वह उन हटाए गए दिल्ली वोटरों को गणना फॉर्म जमा करने दे, जो इसे नहीं भर सके थे। आयोग ने 30 अक्टूबर की तारीख बढ़ाने की बात कही। मामला दो हफ्ते बाद फिर सुनेगा।

दिल्ली में SIR शुरू होते समय 1,45,10,299 मतदाता थे। 97,53,577 ने गणना फॉर्म जमा किए, 47,56,722 ने नहीं। 19,34,243 को लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी पर नोटिस दिया गया।