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मौसमी छिड़काव कर्मचारियों की पेंशन और ग्रेच्युटी पर राज्य मंत्री के निर्देश

सार्वजनिक स्वास्थ्य राज्य मंत्री मेघना साकोरे-बोर्डीकर ने वित्त विभाग की राय लेकर मौसमी छिड़काव कर्मचारियों की लंबित मांगों पर तेजी से कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

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राज्य मंत्री मेघना साकोरे-बोर्डीकर, सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग

दुर्गम इलाकों में भी जनता के स्वास्थ्य के लिए काम करने वाले मौसमी छिड़काव कर्मचारियों की बरसों से लंबित मांगों पर आखिरकार हलचल दिखने लगी है। सार्वजनिक स्वास्थ्य व परिवार कल्याण राज्य मंत्री मेघना साकोरे-बोर्डीकर ने इन कर्मचारियों की पेंशन, ग्रेच्युटी, छठे वेतन आयोग के बकाया अंतर और सातवें वेतन आयोग को लागू करने के मामले पर वित्त विभाग की आधिकारिक राय लेकर आगे की उचित कार्रवाई के साफ निर्देश दिए हैं।

मंत्रालय के पास स्थित 'निर्मल भवन' में राज्य मंत्री मेघना साकोरे-बोर्डीकर की अध्यक्षता में मौसमी छिड़काव कर्मचारियों की लंबे समय से लंबित विभिन्न अधिकारों की मांगों पर एक अहम समीक्षा बैठक हुई।

लंबित मांगों पर विस्तृत चर्चा इस उच्चस्तरीय बैठक में कर्मचारियों के कई अहम मुद्दों पर गहराई से विचार-विमर्श हुआ:

समावेशन और आर्थिक स्थिरता: मौसमी छिड़काव कर्मचारियों का सेवा में एकमुश्त समावेशन।

सेवानिवृत्ति के बाद के लाभ: लंबे समय तक सेवा देने वाले कर्मचारियों को पेंशन और ग्रेच्युटी के लाभ।

वेतन आयोग का बकाया: छठे वेतन आयोग के बकाया से निकलने वाला वेतन अंतर कर्मचारियों को तुरंत चुकाना।

सातवें वेतन आयोग को लागू करना: पात्र कर्मचारियों को संशोधित सातवें वेतन आयोग की श्रेणी के अनुसार लाभ।

अनुकंपा आधार पर नियुक्ति: मौसमी छिड़काव कर्मचारियों के बच्चों को सेवा के दौरान या सेवानिवृत्ति के बाद अनुकंपा आधार पर नौकरी देने की कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी करना।

राज्य मंत्री ने इन सभी मुद्दों पर प्रशासन को सकारात्मक रुख अपनाने और वित्त विभाग के साथ तालमेल से जल्द से जल्द हल निकालने के निर्देश दिए हैं।

वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित बैठक में स्वास्थ्य निदेशक डॉ. विजय कांदेवाड, सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग की उप सचिव डॉ. उर्मिला जोशी, अवर सचिव डॉ. श्वेता सावदेकर, मुख्यमंत्री कार्यालय के समन्वयक चेतन भोजकर तथा स्वास्थ्य सेवा कर्मचारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष बालासाहेब भुजबल और महासंघ के अन्य प्रमुख पदाधिकारी प्रत्यक्ष उपस्थित थे। इसके अलावा स्वास्थ्य आयुक्त काटकर और स्पार्क फाउंडेशन के महेश पोहरणेकर ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक में भाग लिया।