मुंबई: भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) में ग्राहक जानकारी के भंग के असर की बैंक समीक्षा कर रहा है और साइबर बीमा प्रदाता को इसकी सूचना दी है, ऐसा बैंक ने बताया है। कौन-सी जानकारी उजागर हुई, इसकी जांच जारी है।
इस पृष्ठभूमि में रिजर्व बैंक ने देश के बैंकों और पेमेंट कंपनियों को अहम निर्देश दिए हैं। ग्राहकों की व्यक्तिगत जानकारी का भंग होने पर संबंधित संस्थाओं को तकनीकी परिवेश की फोरेंसिक जांच कर यह पुष्टि करनी होगी कि वह सुरक्षित है, ऐसा आरबीआई ने कहा है।
इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन ने कहा है कि व्यक्तिगत डेटा संरक्षण कानून पूरी तरह लागू होने से पहले आरबीआई को नियमन वाली सभी संस्थाओं के लिए यह अनिवार्य करना चाहिए कि वे तय अवधि में ग्राहकों को डेटा भंग की सूचना दें। डेटा भंग की जानकारी छिपाई न जाए, ऐसी मांग भी उसने की।
डिजिटल सेवाओं में बढ़ते साइबर हमलों के बीच यह मुद्दा अहम हो गया है। विशेषज्ञों के मुताबिक, बैंकिंग क्षेत्र में डेटा सुरक्षा और ग्राहकों को समय पर सूचना देने की व्यवस्था की परीक्षा इस घटना ने ली है। विशेषज्ञ ग्राहकों को पासवर्ड बदलने और संदिग्ध संदेशों पर प्रतिक्रिया न देने की सलाह दे रहे हैं।
बैंक ने ग्राहकों को भरोसा दिलाते हुए कहा कि स्थिति पर नजर रखी जा रही है और जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। अंतिम जांच रिपोर्ट के बाद ही डेटा भंग का सही दायरा साफ होगा।
डेटा सुरक्षा की चिंता इसलिए और बढ़ी है क्योंकि एक अलग चेतावनी में कहा गया कि एक डिजिटल सुरक्षा कंपनी द्वारा जारी कमजोर क्रिप्टोग्राफिक की के कारण कुछ बैंकिंग और पेमेंट वेबसाइटों समेत सुरक्षित वेब ट्रैफिक उजागर हो सकता है। नियामक संस्थाओं से साइबर सुरक्षा कड़ी करने और ग्राहकों की जानकारी खतरे में होने पर उन्हें जल्दी सूचित करने पर जोर दे रहे हैं। बैंकों से यह भी कहा जा रहा है कि ग्राहक डेटा से जुड़े तीसरे पक्ष के विक्रेताओं की समीक्षा करें।