मुंबई: ग्राहक डेटा डार्क वेब पर लीक होने के अलर्ट के बाद भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने डेटा लॉस की घटना जाहिर की. बैंक के मुताबिक, प्रारंभिक विश्लेषण में करीब 3.75 लाख रिकॉर्ड में से 3,897 ग्राहक रिकॉर्ड में व्यक्तिगत पहचान योग्य जानकारी (PII) पाई गई.
सेबी के लिस्टिंग नियमों के रेगुलेशन 30 के तहत दी गई सूचना में बैंक ने कहा कि 16 अक्टूबर को उसके थ्रेट इंटेलिजेंस सर्विस प्रोवाइडर, डिफेंस साइबर एजेंसी और CERT-In से संभावित लीक का अलर्ट मिला.
लीक हुए डेटा में ग्राहकों के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर, जन्मतिथि, नाम, लिंग, ईमेल पते, आवासीय पते, ब्रांच और CIF पहचानकर्ता, लीड आईडी तथा लोन और लीड रिकॉर्ड से जुड़ा मेटाडेटा शामिल बताया गया.
बैंक ने इस निष्कर्ष को 'प्रारंभिक' कहा. उसने यह नहीं कहा कि खातों या पैसे को कोई नुकसान हुआ. देश में पिछले कुछ समय में डेटा लीक की कई घटनाएं सामने आई हैं.
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने बार-बार चेतावनी दी है कि लीक हुआ निजी डेटा फिशिंग और ठगी को बढ़ावा देता है. देश की कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम CERT-In उन एजेंसियों में है जिन्होंने बैंक के मुताबिक अलर्ट दिया.
एसबीआई देश का सबसे बड़ा बैंक है. बुधवारी बाजार की व्यापक गिरावट के बीच उसके शेयरों में भी कारोबार हुआ, जब सेंसेक्स 143 अंक लुढ़का था.
बैंक ने यह नहीं बताया कि डेटा तक पहुंच कैसे बनी; उसने कहा कि वह मामले की जांच कर रहा है. लिस्टेड कंपनियों के लिए ऐसा खुलासा सेबी नियमों के तहत जरूरी है.
बैंक देश का सबसे बड़ा ऋणदाता है और ऐसी घटनाएं ग्राहक डेटा रखने वाली संस्थाओं के लिए बड़ी चिंता हैं.