मुंबई: महाराष्ट्र की उस बहस का केंद्र अब गृह मंत्री को लिखा एक पत्र है, जिसकी शुरुआत एक ऑडियो क्लिप से हुई थी। शिवसेना (UBT) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने सोमवार को अमित शाह को पत्र लिखकर मांग की कि मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरंगे को ₹500 करोड़ दिए जाने के आरोप की प्रवर्तन निदेशालय (ED) जांच हो।
जरंगे ने पिछले हफ्ते वह क्लिप जारी किया था। राउत ने पत्र में कहा है कि रिकॉर्डिंग में कथित तौर पर ऐसी बातचीत है, जिसमें आरोप है कि ₹500 करोड़ उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बेटे और शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे के जरिए जरंगे तक पहुंचाए गए।
जरंगे ने कोई पैसा मिलने से इनकार किया है। उनका कहना है कि उनके खिलाफ साजिश रची गई, क्योंकि वे किसानों और आम लोगों के मुद्दे उठा रहे थे। एकनाथ शिंदे और श्रीकांत शिंदे दोनों आरोपों को खारिज कर चुके हैं।
राउत ने आरोपों को "बेहद गंभीर" बताया और अपनी मांग को चार सवालों के रूप में रखा। उन्होंने लिखा, "₹500 करोड़ किसने किसको दिए, और अगर यह पैसा जरंगे पाटील तक नहीं पहुंचा तो कहां गायब हो गया? इतनी बड़ी रकम कहां से आई और कहां गई?" उन्होंने शाह से महाराष्ट्र पुलिस और ED दोनों को जांच का आदेश देने और "तथ्य महाराष्ट्र और देश की जनता के सामने लाने" को कहा।
इसे संभावित मनी लॉन्ड्रिंग मामला बताते हुए राउत ने तुलना दी। उन्होंने मार्च 2021 में तत्कालीन मुंबई पुलिस आयुक्त परम बीर सिंह के उस आरोप का जिक्र किया, जिसमें तत्कालीन गृह मंत्री अनिल देशमुख पर हर महीने ₹100 करोड़ वसूलने को कहने का आरोप था। राउत ने कहा कि तब वे आरोप साबित नहीं हुए थे, फिर भी ED ने मामला चलाया और देशमुख को गिरफ्तार किया। उनका तर्क था कि जरंगे का मामला ज्यादा गंभीर है, क्योंकि उनके मुताबिक इसमें ऑडियो क्लिप सबूत के तौर पर सामने रखी गई है और रकम बड़ी है।
क्लिप के इर्द-गिर्द की राजनीति अपने आप में एक अलग कहानी बन गई है। शनिवार को BJP ने आरोप लगाया कि राउत ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी का एजेंडा आगे बढ़ाने और सत्तारूढ़ सहयोगियों के बीच फूट डालने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से नकली ऑडियो क्लिप बनाई। इसके बाद राउत ने दावा किया कि क्लिप एक BJP एमएलसी ने लीक की, जिसे उन्होंने पार्टी के अंदर की कट-थ्रोट प्रतिस्पर्धा करार दिया।
जरंगे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से विवाद की तह तक जाने की अपील की है। उन्होंने दोहराया कि वे साजिश के तहत निशाने पर हैं और आरोप लगाया कि उन्हें बदनाम करने तथा मराठा आरक्षण आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश में पार्टी फंड का इस्तेमाल हुआ।