मुख्य सामग्री पर जाएं
मुख्यमंत्रीमुख्यमंत्री
राजनीति

सड़क और उपेक्षित बच्चों के पुनर्वास के लिए ‘फिरते पथक’; मंत्री आदिती तटकरे के निर्देश

महिला एवं बाल विकास मंत्री आदिती तटकरे ने 22 जिलों की 31 महानगरपालिकाओं में फिरते पथक योजना के प्रस्ताव मंगाने के निर्देश दिए हैं। छह जिलों के पायलट में अब तक 3,803 बच्चों को सहायता मिल चुकी है।

· · 2 मिनट में पढ़ें
सड़क पर रहने वाले बच्चों के पुनर्वास पर मंत्री आदिती तटकरे

मुंबई, 20: सड़कों पर रहने वाले, अनाथ, अकेले और उपेक्षित बच्चों के पुनर्वास के लिए ‘फिरते पथक’ (मोबाइल दस्ता) पायलट योजना छह जिलों में सफलतापूर्वक लागू की गई थी। इसी पायलट के आधार पर महिला एवं बाल विकास मंत्री आदिती तटकरे ने 22 जिलों की 31 महानगरपालिकाओं में फिरते पथक योजना के प्रस्ताव मंगाने के निर्देश दिए हैं। मंत्रालय में इस योजना पर हुई बैठक में यह फैसला लिया गया। बैठक में संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

इस योजना के तहत मोबाइल वाहनों के जरिए सड़कों पर रहने वाले बच्चों को पौष्टिक आहार, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा और मनोरंजन की सुविधाएं दी जाती हैं। बच्चों का आधार पंजीकरण, परामर्श और मानसिक सहारा दिया जाता है और माता-पिता में शिक्षा के प्रति जागरूकता फैलाई जाती है। सड़क पर रहने वाले बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा में लाने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं।

इससे पहले नाशिक, पुणे, मुंबई शहर, मुंबई उपनगर, ठाणे और नागपुर इन छह जिलों में यह परियोजना लागू की गई थी। इससे अब तक 3,803 बच्चों को शैक्षणिक, स्वास्थ्य, मनोरंजन और आहार सुविधाएं दी गई हैं और कई बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा में लाने में सफलता मिली है। इनमें पुणे जिले में सबसे अधिक 1,679, मुंबई शहर में 810, ठाणे में 750, नाशिक में 285 और नागपुर में 279 बच्चे शामिल हैं।

राज्य के 28 महानगरपालिका क्षेत्रों के साथ मुंबई शहर, पूर्व उपनगर और पश्चिम उपनगर, इस तरह कुल 31 फिरते पथकों के क्रियान्वयन का प्रस्ताव है।

मंत्री आदिती तटकरे ने कहा कि स्वयंसेवी संस्थाओं को मुंबई सार्वजनिक विश्वस्त अधिनियम के तहत पंजीकरण, निधि पोर्टल पर प्रविष्टि, पिछले तीन वर्षों के लेखा परीक्षा रिपोर्ट तथा संस्था का संविधान और नियमावली जमा करनी होगी। फिरते पथकों के लिए तैनात वाहनों में सीसीटीवी कैमरे और ट्रैकिंग सिस्टम लगाना अनिवार्य होगा, और यह व्यवस्था संबंधित पुलिस विभाग के समन्वय से काम करेगी।

संबंधित संस्थाओं को बाल कल्याण समिति, बाल अधिकार आयोग और स्थानीय पुलिस प्रशासन को अपने कार्यक्षेत्र की जानकारी देना भी जरूरी होगा। संस्थाओं से नए सिरे से आवेदन मंगाए जाएंगे और पूरी प्रक्रिया तेजी से पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।

नियमों का उल्लंघन होने पर संबंधित संस्था का करार रद्द कर वैकल्पिक संस्था नियुक्त करने का प्रावधान भी किया गया है।