मुंबई : बैंकिंग सिस्टम में पड़ा अतिरिक्त पैसा खींचने के लिए आरबीआई ने ₹50,000 करोड़ की वेरिएबल रेट रिवर्स रेपो (वीआरआरआर) नीलामी का ऐलान किया। लेकिन बैंकों ने इसमें सिर्फ ₹23,905 करोड़ की बोली लगाई।
सोमवार को बैंकिंग सिस्टम में करीब ₹2 लाख करोड़ की तरलता थी। उसके बाद यह नीलामी आई। बैंकों का जवाब आधे से भी कम रहा।
वीआरआरआर में बैंक अपना अतिरिक्त पैसा तय अवधि के लिए आरबीआई के पास रखते हैं और उस पर ब्याज कमाते हैं। सिस्टम में पैसे का बहाव काबू में रखने के लिए आरबीआई इस औजार का इस्तेमाल करता है।
बोली कम क्यों लगी, इसकी साफ वजह नहीं बताई गई। लेकिन सामने आई जानकारी के मुताबिक बैंकिंग सिस्टम का अतिरिक्त पैसा सभी बैंकों में एक जैसा नहीं है। जिनके पास ज्यादा तरलता है, वही बैंक बोली लगाने आगे आते हैं।
मंगलवार को भारित औसत कॉल रेट 5.45 फीसदी था। सोमवार को यह 5.50 फीसदी था। कॉल रेट वह दर है, जिस पर बैंक एक-दूसरे से कम अवधि के लिए कर्ज लेते हैं।
आरबीआई बुधवार को ₹50,000 करोड़ की एक और वीआरआरआर नीलामी करेगा।
तरलता का यह सवाल महंगाई और ब्याज दर के फैसले से जुड़ा है। सिस्टम में ज्यादा पैसा रहा तो कम अवधि की दरें नीचे आती हैं, कम रहा तो ऊपर जाती हैं।
आगे इन नीलामियों पर कैसा जवाब मिलता है, उससे साफ होगा कि बैंकिंग सिस्टम में पैसे की जरूरत कहां टिकी है।
बुधवार की नीलामी में भी ₹50,000 करोड़ की ही रकम रखी गई है। बोली कितनी लगती है, इससे आगे की दिशा तय होगी।