मुंबई: आरबीआई अपनी बेंचमार्क ब्याज दर में दो और बढ़ोतरी कर सकता है, और तीसरी भी संभव है, ऐसा अक्टूबर की मौद्रिक नीति बैठक के मिनट्स से पता चलता है। इससे आगे सख्ती की ओर झुकाव का संकेत मिलता है।
मौद्रिक नीति समिति ने 7 अक्टूबर को रेपो दर 25 आधार अंक बढ़ाकर 5.50 फीसदी करने का सर्वसम्मत फैसला किया। करीब चार साल में यह पहली बढ़ोतरी थी। समिति ने अपना रुख तटस्थ से 'संयमित सख्ती' में बदला। स्थायी जमा सुविधा दर 5.25 फीसदी किया गया, जबकि सीमांत स्थायी सुविधा दर और बैंक दर 5.75 फीसदी पर बरकरार रहे।
गवर्नर संजय मल्होत्रा ने तब कहा था कि निकट अवधि में दर कटौती की गुंजाइश नहीं है और अगला कदम बढ़ोतरी या विराम ही हो सकता है। सदस्य आगे कितनी बढ़ोतरी देख रहे हैं, यह अब मिनट्स से साफ हो रहा है।
समिति ने वित्त वर्ष 2027 के लिए महंगाई का अनुमान 5 फीसदी से बढ़ाकर 5.2 फीसदी किया और कहा कि अगली तीन तिमाहियों में सीपीआई महंगाई औसतन 5.8 फीसदी रहेगी। इसी अवधि के लिए वास्तविक जीडीपी वृद्धि का अनुमान 6.7 से बढ़ाकर 7.1 फीसदी किया, जो घरेलू गतिविधि की मजबूती दर्शाता है।
महंगे कच्चे तेल, बढ़ते वैश्विक बॉन्ड यील्ड और कमजोर रुपये से राहत की गुंजाइश घटने के बीच यह नीति बदलाव हुआ है। खाद्य कीमतें भी मजबूत हुई हैं।
कर्जदारों के लिए यह संकेत मायने रखता है। बैंक नए कर्ज की ब्याज दर रेपो दर पर तय करते हैं। और बढ़ोतरी होने पर नए घर और वाहन कर्ज की मासिक किस्तें तथा कंपनियों की उधारी लागत बढ़ेगी।
अगली नीति में समिति विराम लेती है या बढ़ोतरी करती है, इस पर नजर रहेगी।