जयपुर : पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने "रगड़ाई" — संघर्ष और मेहनत — शब्द को फिर राज्य की राजनीतिक शब्दावली में ला दिया है। उन्होंने पार्टी के एक सहयोगी से कहा कि बिना संघर्ष के पद तक पहुंचने वाले नेता ठीक से काम नहीं कर पाते।
"अब आप रगड़ाई से गुजर रहे हैं ना? मैं सालों से कहता आया हूं कि संघर्ष से गुजरे बिना पद मिले तो वह काम ठीक से नहीं होता," गहलोत ने कांग्रेस नेता सीबी यादव से कहा।
इस टिप्पणी का इतिहास है। जुलाई 2019 में सचिन पायलट की बगावत के दौरान गहलोत ने पायलट के लिए यही शब्द इस्तेमाल किया था, जिस पर पार्टी में बड़ा विवाद छिड़ा था। शब्द के लौटने से राजस्थान कांग्रेस के हलकों में फिर चर्चा शुरू हो गई है और प्रतिद्वंद्वी गुट सोशल मीडिया पर आलोचना कर रहे हैं।
गहलोत ने कहा कि इच्छुक नेताओं को एनएसयूआई, भारतीय युवक कांग्रेस और पार्टी के जरिए ऊपर आना चाहिए, आंदोलनों में हिस्सा लेना चाहिए और टिकट हासिल करना चाहिए। उन्होंने कहा कि उन्होंने भी वही संघर्ष किया है।
यह टिप्पणी कांग्रेस नेताओं के जयपुर पुलिस कमिश्नरेट के बाहर धरने की पृष्ठभूमि में आई। उन्होंने दिल्ली के एक विरोध में ऋतु बराला पर कथित हमले की आरोपी महिला पुलिसकर्मी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग की। गहलोत ने कमिश्नरेट जाकर एनएसयूआई की राष्ट्रीय सचिव ऋतु बराला, यादव और विधायक रफीक खान से बात की।
यादव ने गहलोत से कहा कि कैंप आयोजित करने के बाद भी टिकट नहीं मिल रहे — इसी बातचीत से पूर्व मुख्यमंत्री का जवाब आया।
राजस्थान कांग्रेस में गुटबाजी की चर्चा नई नहीं है। 'रगड़ाई' शब्द के लौटने से वरिष्ठ और युवा नेताओं की होड़ उजागर होती है। टिकट बंटवारे को लेकर नाराजगी समय-समय पर सामने आती रही है।