संगरूर: मुख्यमंत्री भगवंत मान को विधानसभा भेजने वाले जिले से कांग्रेस ने पंजाब का चुनावी मैदान खोल दिया है, और इसे छिपाया भी नहीं जा रहा।
राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे बुधवार को संगरूर के फगुवाला गांव में 'इंसाफ रैली' के लिए पहुंच गए। सभा से पहले दोनों नशे से जुड़ी हिंसा में मारे गए लोगों के परिवारों से मिलेंगे। प्रदेश अध्यक्ष परगट सिंह ने बताया कि पार्टी ने एक लाख लोग जुटाने का लक्ष्य रखा है।
संगरूर मुख्यमंत्री का गृह जिला है और जगह के चुनाव के पीछे गणित है। जिस मालवा पट्टी में यह जिला आता है, वहां 69 विधानसभा सीटें हैं। 2022 में इस इलाके में कांग्रेस की जमीन खिसक गई थी और तब से पार्टी उसे वापस पाने की कोशिश में है।
मंगलवार को सभा स्थल और तैयारियों का जायजा लेने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए सिंह ने कहा कि रैली 'पंजाब के अधिकार, न्याय और भविष्य से जुड़े मुद्दों' को उठाने का मंच बनेगी। राज्य कई बड़ी चुनौतियों का सामना कर रहा है।
'कांग्रेस पार्टी हमेशा पंजाब के लोगों के साथ खड़ी रही है और उनके संवैधानिक और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए लड़ती रही है,' उन्होंने कहा। 'यह रैली पंजाब के लोगों की चिंताओं और मांगों को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने का अहम मंच बनेगी।'
दिन के मुद्दों की सूची राज्य में नई नहीं है — नशा, बेरोजगारी, किसान और कानून-व्यवस्था। पंजाब में नशे का सवाल सालों से राज्य की राजनीति के केंद्र में रहा है। कांग्रेस ने आंकड़ों की जगह परिवारों को आगे किया है — पीड़ितों के रिश्तेदारों को कैमरों के सामने खड़ा करके।
पंजाब में 2027 में चुनाव हैं। भगवंत मान की आम आदमी पार्टी सरकार 2022 से सत्ता में है और कांग्रेस ने इन सालों में सत्ताधारी दल से जितना, अपनी ही अंदरूनी कलह से भी उतना ही लोहा लिया है।
खड़गे की मौजूदगी यह संकेत है कि दिल्ली का नेतृत्व प्रदेश इकाई के साथ खड़ा है। राहुल गांधी के लिए संगरूर उस दौरे का पहला पड़ाव है जिसमें पंजाब के मतदाता एक सवाल पूछेंगे — आम आदमी पार्टी ने जो नहीं दिया, कांग्रेस क्या देगी?
मालवा पट्टी के कार्यकर्ताओं को आज की सभा के लिए जुटाया गया है। फगुवाला की भीड़ वोटों में कितनी बदलती है, यह आगे के चुनाव दिखाएंगे।