मोहाली: सीबीआई ने अपने सवाल खत्म कर लिए हैं। चारों आरोपी अब जेल में हिरासत में इंतजार कर रहे हैं।
अधिकारियों के मुताबिक मोहाली की विशेष सीबीआई अदालत ने बुधवार को नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या के चारों आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया, क्योंकि एजेंसी ने हिरासत में पूछताछ पूरी कर ली। आरोपियों में मुख्य आरोपी और मेडिकल स्टोर मालिक अश्विनी कुमार, उसकी पत्नी नीलम रानी और कथित सहयोगी विपिन गर्ग तथा लाडी शामिल हैं।
सीबीआई को पहले अश्विनी, विपिन और लाडी की पांच दिन की हिरासत मिली थी, जबकि अदालत ने नीलम रानी की चार दिन की हिरासत दी थी, जिनकी न्यायिक हिरासत मंगलवार से शुरू हुई।
झोटा की हत्या 13 अक्टूबर को मानसा में हुई। मामले के मुताबिक अश्विनी ने कथित तौर पर प्रिस्क्रिप्शन दवाओं की अवैध बिक्री को लेकर अपने मेडिकल स्टोर पर हुई बहस के दौरान उन्हें गोली मारी। झोटा उस वक्त फेसबुक पर बहस की लाइव स्ट्रीमिंग कर रहे थे, जब गोलीबारी में उनकी मौत हुई और चार लोग घायल हुए।
गोलीबारी के बाद अश्विनी पंजाब से भाग गया और राजस्थान के सालासर से पकड़ा गया। इसके बाद पंजाब पुलिस ने नीलम और दो कथित सहयोगियों को भगाने में मदद के आरोपों में गिरफ्तार किया।
झोटा के परिवार की मांग के बाद पंजाब सरकार ने मामला केंद्रीय एजेंसी को सौंपने का फैसला किया, जिसके बाद सीबीआई ने जांच संभाली। एजेंसी ने नई एफआईआर दर्ज की और स्थानीय पुलिस से मूल जांच रिकॉर्ड ले लिया।
यह मामला राज्य में नशा रोकथाम पर चल रही राजनीतिक बहस के साथ-साथ चला है और सीबीआई को स्थानांतरण सत्तारूढ़ दल तथा विपक्ष के बीच विवाद का बिंदु बना। झोटा के परिवार ने केंद्रीय जांच की मांग करते हुए कहा था कि स्थानीय जांच स्वतंत्र नहीं होगी।
सीबीआई की पूछताछ में क्या सामने आया, यह सार्वजनिक नहीं किया गया है। एजेंसी का अगला कदम आरोप पत्र माना जा रहा है, और बढ़ोतरी की मांग नहीं हुई तो उस फाइलिंग से पहले ही न्यायिक हिरासत की अवधि खत्म हो जाएगी।
गोलीबारी में चार लोग घायल हुए थे और उनका इलाज हुआ है। उनके बयान उस रिकॉर्ड का हिस्सा हैं जो एजेंसी ने स्थानीय पुलिस से लिया है।