चंडीगढ़: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पंजाब से नशे के कारोबार को खत्म करने की समयसीमा 31 दिसंबर 2029 तय कर दी है और कहा है कि नशे के खिलाफ आवाज उठाने वालों की हत्या के मामलों में सीबीआई सबसे ताकतवर आरोपी तक पहुंचेगी।
मंगलवार को लुधियाना में विजयादशमी समारोह में बोलते हुए शाह ने कहा कि राज्य की आम आदमी पार्टी सरकार ने सत्ता में आने के तीन महीने में नशा खत्म करने का वादा किया था, लेकिन पांच साल बाद भी वह इसमें नाकाम रही। उन्होंने कहा, "31 दिसंबर 2029 तक पंजाब नशीले पदार्थों के कारोबार से मुक्त होगा। हम नशा मुक्त पंजाब बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।"
शाह ने दिनभर गुरदासपुर, संगरूर और मानसा में पीड़ित परिवारों से मुलाकात की, जिनमें बिक्रमजीत सिंह, गुलजार सिंह और नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा के परिजन शामिल थे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान ने झोटा मामला सीबीआई को सौंपकर सही कदम उठाया और बाकी दो मामले भी एजेंसी को दिए जाएं।
भाजपा शासित गुजरात और महाराष्ट्र में बड़ी नशा जब्ती पर सवालों को खारिज करते हुए शाह ने कहा कि वहां 20,000 करोड़ रुपये के नशीले पदार्थ पकड़े गए और सवाल किया कि फिर पंजाब तक ड्रग्स कैसे पहुंचती है। उन्होंने कहा, "क्या राजनीतिक संरक्षण के बिना पंजाब में ड्रग्स आना संभव है?"
मान ने कुछ ही घंटों में जवाब दिया। उन्होंने कहा, "अब चुनाव आ गए हैं, तो आपको पंजाब की चिंता है।" उन्होंने याद दिलाया कि 2007 से 2017 के बीच भाजपा अकाली दल के साथ सत्ता में थी, जब नशा बढ़ा। मान ने कहा कि उन्होंने पाकिस्तान से लगी 500 किलोमीटर सीमा के लिए एंटी-ड्रोन प्रणाली की बात कई बार उठाई, पर केंद्र ने मंजूरी नहीं दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि नशे के खिलाफ जंग जारी रहेगी।