जब रोजी-रोटी का सहारा ही अचानक टूट गया... बी.कॉम की पढ़ाई और साथ में आईटीआई सीएनसी व लेथ ऑपरेटर का तकनीकी कौशल। हाथ में काम और परिवार के लिए कुछ कर दिखाने का हौसला लिए प्रदीप काटकर ठाणे की नामी 'सुपरमैक्स' (Super-Max) कंपनी में मशीन ऑपरेटर के रूप में ईमानदारी से काम कर रहे थे। हर महीने की तनख्वाह से घर की गाड़ी ठीक से चल रही थी।
लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। कंपनी ने अचानक अपना प्लांट बंद करने का चौंकाने वाला फैसला सुना दिया। सैकड़ों कामगारों के परिवार सड़क पर आ गए, वेतन रुक गया और एक न खत्म होने वाली कानूनी लड़ाई शुरू हो गई। महीने दर महीने बीतते गए। अदालतों के चक्कर लगाने के बावजूद हाथ में सिर्फ इंतजार और निराशा ही आई। घर की जिम्मेदारियां, बढ़ता खर्च और भविष्य की चिंता... एक आम परिवार के युवा की मानसिक स्थिति सोचकर ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं।
"इतना पढ़-लिखकर कपड़े इस्त्री करोगे?" समाज के ताने और विरोध ऐसे अंधेरे मोड़ पर बैठकर रोने के बजाय प्रदीप ने अपने दम पर खड़े होने का फैसला किया। उन्होंने लॉन्ड्री का कारोबार शुरू करने का विचार रखा। लेकिन हमारे समाज में किसी ग्रेजुएट युवा का ऐसा काम चुनना आसानी से गले नहीं उतरता।
"इतनी पढ़ाई और तकनीकी ज्ञान के बाद आखिर लोगों के कपड़े धोओगे और इस्त्री करोगे?"
दोस्तों और परिवार की ओर से शुरुआत में जोरदार विरोध हुआ। कुछ लोगों ने नाक-भौं सिकोड़ी, कुछ ने हमदर्दी जताई तो कुछ ने मजाक भी उड़ाया। इस विरोध ने प्रदीप के मन को जरूर चोट पहुंचाई, लेकिन उनकी आंखों में खुद को साबित करने की आग थी। उन्होंने लोगों की बातों पर ध्यान नहीं दिया और अपमान भरे उन शब्दों को ही अपनी कामयाबी की ताकत बना लिया।
छह महीने की कठिन तैयारी और 'M Spark' का जन्म कारोबार सिर्फ जोश में शुरू नहीं किया जा सकता, यह प्रदीप जानते थे। इसलिए उन्होंने लगातार छह महीने लॉन्ड्री कारोबार का बारीकी से अध्ययन किया। कपड़ों के प्रकार, आधुनिक तकनीक, केमिकल, स्टीम प्रेस और ग्राहकों की जरूरतों को समझा।
सारी तैयारी पूरी होने पर उन्होंने ठाणे के रामचंद्र नगर नंबर 3 में 'M Spark Power Laundry' शुरू की।
पारंपरिक तरीके से कपड़े संभालने के बजाय प्रदीप ने अपनी तकनीकी समझ और आधुनिक मशीनों का भरपूर इस्तेमाल किया। समय पर सेवा, कपड़ों की अच्छी देखभाल और ईमानदारी, इस तीन-सूत्री फॉर्मूले ने थोड़े ही समय में ग्राहकों का भरोसा जीत लिया। जिन हाथों ने कभी भारी फैक्ट्री मशीनें चलाई थीं, वही हाथ अब एक उद्यमी के आत्मविश्वास के साथ नया कारोबार खड़ा कर रहे थे।
अब खुद मालिक और दूसरे युवाओं का सहारा! कभी अपनी तनख्वाह अटकने से संकट में फंसे प्रदीप काटकर आज चार से पांच जरूरतमंद युवाओं को रोजगार दे रहे हैं। जो आंखें कल तक शक से देखती थीं, वे आज गर्व से उनकी ओर देखती हैं।
शून्य से शुरू हुई 'M Spark Power Laundry' आज ठाणे में अच्छी सेवा और एक मराठी युवक के स्वाभिमान का प्रतीक बन चुकी है। काम कोई भी छोटा नहीं होता, असली ताकत काम के प्रति निष्ठा और ईमानदार मेहनत में होती है, यह प्रदीप काटकर ने साबित कर दिखाया है।
परिस्थितियां गिराएं तो हार मानकर बैठना नहीं, बल्कि हिम्मत से फिर खड़े होकर दुनिया को दिखाना है। यही सीख प्रदीप काटकर की इस सफल कहानी से आज की युवा पीढ़ी को मिलती है!

