लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने पीलीभीत विधानसभा क्षेत्र की 10,470 मतदाता प्रविष्टियों में अनियमितता पाए जाने के बाद दो कार्यरत और पूर्व निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों पर कानूनी कार्रवाई तथा एक कंप्यूटर सहायक की बर्खास्तगी के आदेश दिए हैं।
अधिकारियों ने गुरुवार को बताया कि क्षेत्र के कुछ मतदाताओं का EPIC (मतदाता पहचान पत्र) नंबर ऑनलाइन खोजने पर दूसरे मतदाताओं की जानकारी सामने आ रही थी। इसी शिकायत के बाद सूची की जांच शुरू की गई।
मतदाता सूची की प्रविष्टियां लोकसभा और विधानसभा चुनाव की बुनियादी प्रक्रिया होती हैं। सूची में सुधार का अंतिम चरण खत्म होने के बाद भी ऐसी गड़बड़ियां मिलने से चुनावी व्यवस्था पर सवाल उठे हैं।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय के मुताबिक, दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के साथ सूची में सुधार की प्रक्रिया भी शुरू की गई है। संबंधित प्रविष्टियों की पड़ताल कर बदलाव किए जा रहे हैं।
उत्तर प्रदेश में 2027 में विधानसभा चुनाव होने की संभावना है। इसलिए मतदाता सूची की सटीकता पर सभी दलों की नजर टिकी है। विपक्ष इससे पहले भी सूची में गड़बड़ी का मुद्दा उठाता रहा है।
पीलीभीत की घटना को सूची प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर हुई तकनीकी गड़बड़ी के उदाहरण के तौर पर देखा जा रहा है। निर्वाचन आयोग ने ऐसी गड़बड़ियां रोकने के लिए तंत्र को सख्त निर्देश दिए हैं।
अधिकारियों के मुताबिक, दोषियों पर कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है और आगे की जांच में और प्रविष्टियां जांची जाएंगी।
निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया में मतदाता सूची में सुधार, नए नाम जोड़ने और हटाने के चरण तय समय में पूरे होते हैं। अंतिम सूची जारी होने के बाद बदलाव सीमित रहते हैं, इसलिए सूची की सटीकता की जिम्मेदारी संबंधित तंत्र पर होती है। पीलीभीत मामले में प्रविष्टियों की पड़ताल कर सुधार शुरू किया गया है। मतदाताओं से अपील है कि वे अपने पहचान पत्र की जानकारी जांच लें।