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जाति-पाति पर बड़े होने वाले नेता का भविष्य नहीं: पंकजा मुंडे का बीड से तंज

पर्यावरण और पशुसंवर्धन मंत्री पंकजा मुंडे ने बीड के भगवान भक्तीगढ़ में दशहरा मेलावे से जाति-आधारित राजनीति पर निशाना साधा। उन्होंने जालना जिले के अंतरवली सराटी गांव को गोद लेने का भी ऐलान किया।

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जाति-पाति पर बड़े होने वाले नेता का भविष्य नहीं: पंकजा मुंडे का बीड से तंज

बीड: जाति-पाति के सहारे बड़ा होने वाले नेता का इस देश में कोई भविष्य नहीं है। यह बात पर्यावरण और पशुसंवर्धन मंत्री पंकजा मुंडे ने मंगलवार को बीड के पाटोदा तालुका स्थित सावरगांव घाट के श्रीक्षेत्र भगवान भक्तीगढ़ पर हुए दशहरा मेलावे में कही। मेलावा इस बार बारहवें साल में पहुंचा था।

मंत्री मुंडे ने मेलावे में पहुंचकर भगवानबाबा की पूजा-आरती की और हाथ में ध्वज लेकर मौजूद लोगों का अभिवादन किया। मंच पर राज्यमंत्री मेघना बोर्डीकर, विधायक धनंजय मुंडे, विधायक मोनिका राजले, विधायक नमिता मुंदड़ा, पूर्व सांसद डॉ. प्रीतम मुंडे, पूर्व मंत्री महादेव जानकर, पूर्व सांसद सुजय विखे पाटील और प्रो. लक्ष्मण हाके समेत कई जाने-माने चेहरे मौजूद थे।

'मेरी खाल की जूतियां बनाकर पहना दो, तो भी आपका उपकार नहीं चुका सकती। यह सूखे का मेलावा है। सीएसआर फंड से चारा पहुंचाना और राहत राशि के लिए मैं आपकी छाया बनकर काम करूंगी,' मुंडे ने कहा।

मराठवाड़ा और बीड जिले पर सूखे का साया है। 'सूखा किसी को छोटा या बड़ा नहीं देखता। पानी, चारा और जानवरों के जीने का सवाल सबके लिए एक जैसा है,' कहते हुए उन्होंने जाति-धर्म की दीवारें तोड़कर एकजुट होकर सूखे से लड़ने की अपील की।

मेलावे की सबसे बड़ी घोषणा थी कि मुंडे ने जालना जिले के अंबड तालुका का अंतरवली सराटी गांव गोद ले लिया। मनोज जरांगे पाटील के मराठा आरक्षण आंदोलन का गढ़ रहे इस गांव का विकास बीड के गांवों की तरह करने की बात उन्होंने कही। 'बीड जिले के हर गांव जितना प्यार मैं अंतरवली से करूंगी,' उन्होंने कहा।

नई पीढ़ी को उन्होंने सीधी सलाह दी। आज की पीढ़ी जेन-ज़ी है, उसकी अगुवाई मुद्देसे होनी चाहिए, गुंडागर्दीसे नहीं। देश या घर जलाकर आंदोलन करने वाले युवा नहीं, बल्कि लोकनेता गोपीनाथ मुंडे जैसे देश को आगे ले जाने वाले सैनिक चाहिए।

विधायक धनंजय मुंडे ने भी अपने अंदाज में विरोधियों को चेताया। 'कुछ महफिलें मेरी तबाही के लिए बैठी हैं, लेकिन उन्हें अभी पता नहीं कि हवा का रुख बदल रहा है,' उन्होंने कहा।

आगे की राह के संकेत देते हुए पंकजा मुंडे ने कहा — 'भीड में खड़ा होना मेरा मकसद नहीं है, बल्कि भीड जिसके लिए खड़ी होती है वह बनना है।'