भुवनेश्वर: पूर्व मुख्यमंत्री और बीजू जनता दल (बीजद) अध्यक्ष नवीन पटनायक ने विवादित कोटिया ग्राम पंचायत के तीन गांवों में पंचायत चुनाव कराने की आंध्र प्रदेश की कोशिश पर राज्य सरकार की चुप्पी को सार्वजनिक रूप से सवाल बनाया है।
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी को लिखे पत्र में पटनायक ने पूछा कि भाजपा नीत सरकार अपने केंद्रीय सहयोगी तेलुगु देशम पार्टी के राजनीतिक दबाव के आगे झुकती क्यों दिख रही है। उन्होंने सीधे पूछा कि क्या "राजनीतिक निर्भरता" ही वजह है कि सरकार आंध्र प्रदेश की अधिसूचना का सामना करने से हिचक रही है।
कोटिया विवाद दशकों पुराना है। 1968 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने दोनों राज्यों से कोटिया ग्राम पंचायत के 28 गांवों पर यथास्थिति बनाए रखने को कहा था। तब से दोनों राज्य इनमें से 21 गांवों पर मालिकाना हक को लेकर टकराते रहे हैं, और शीर्ष अदालत बार-बार इस मामले को संसदीय व्यवस्था के भरोसे छोड़ती रही है। ओडिशा ने जनवरी 2022 में सुप्रीम कोर्ट में नया मुकदमा दायर किया, जो अब भी लंबित है।
आंध्र प्रदेश की अधिसूचना में जिन गांवों के नाम हैं, वे फगुनासिनेरी, गंजेईपदर और फटुसिनेरी हैं, और चुनाव प्रक्रिया इन गांवों की प्रशासनिक स्थिति बदल सकती है।
राजस्व और आपदा प्रबंधन विभाग संभालने वाले राज्य मंत्री सुरेश पुजारी ने कहा कि सरकार पड़ोसी राज्य की किसी भी "उकसाने वाली कोशिश" को नाकाम करने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि कोटिया ग्राम पंचायत ओडिशा का अभिन्न अंग है, दक्षिणी संभाग के राजस्व मंडल आयुक्त को हालात पर करीबी नजर रखने को कहा गया है और कोरापुट के जिलाधिकारी को सतर्क रहने का निर्देश दिया गया है।
कांग्रेस विधायक दल के नेता और कोरापुट के विधायक राम चंद्र कदम ने भाजपा नीत सरकार पर "दोहरे मापदंड" का आरोप लगाया और कहा कि उसकी निष्क्रियता ने आंध्र प्रदेश को अपना दावा आगे बढ़ाने दिया। पटनायक के पत्र ने सीमा विवाद को फिर ओडिशा के राजनीतिक एजेंडे के केंद्र में ला दिया है।