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दो अफसर, एक विवादित सीमा; आंध्र का चुनाव कैलेंडर कोटिया तक पहुंचा तो ओडिशा हरकत में

आंध्र प्रदेश ने कोटिया में पंचायत चुनाव की तैयारी शुरू करने के बाद ओडिशा सरकार ने वहां पुलिस और राजस्व विभाग के अधिकारी तैनात करने का फैसला किया है। विपक्षी बीजेडी और कांग्रेस ने सरकार की 'चुप्पी' पर सवाल उठाए हैं।

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भुवनेश्वर: कोटिया इलाके में आंध्र प्रदेश द्वारा पंचायत चुनाव की तैयारी शुरू करने के बाद ओडिशा सरकार ने वहां पुलिस और राजस्व विभाग के एक-एक अधिकारी को तैनात कर हालात पर नजर रखने का फैसला किया है। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
दोनों विभागों के अधिकारी कोटिया में तैनात रहकर आंध्र की गतिविधियों और ओडिशा की परियोजनाओं की नियमित रिपोर्ट राज्य सरकार को देंगे। पुजारी ने कहा कि प्रादेशिक हितों की रक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट में कानूनी विकल्प तलाशे जाएंगे।
कोटिया कोरापुट जिले में ओडिशा-आंध्र सीमा पर विवादित इलाका है। कोटिया पंचायत में 28 गांव हैं; ओडिशा सभी 28 गांवों को अपना मानती है, जबकि आंध्र 21 गांवों पर दावा करता है। 1968 में यह विवाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया गया था।
बीजेडी अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष नवीन पटनायक ने सोमवार को मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी को पत्र लिखकर चिंता जताई थी। बीजेडी के मीडिया समन्वयक लेनिन महांती ने आरोप लगाया कि आंध्र की सत्तारूढ़ टीडीपी से गठबंधन के कारण भाजपा सरकार का रुख कमजोर पड़ गया।
कांग्रेस के कोरापुट सांसद सप्तगिरी शंकर उलका, पोट्टंगी विधायक रामचंद्र कदम और जयपुर विधायक ताराप्रसाद बहिनीपती ने भी सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए। आंध्र ने पंचायत चुनाव 26, 29 नवंबर और 2 दिसंबर को घोषित किए हैं।
इस समीक्षा बैठक में कोरापुट के कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक, दक्षिणी राजस्व मंडल आयुक्त, महाधिवक्ता, विधि सचिव और वरिष्ठ राजस्व अधिकारी मौजूद थे। ओडिशा पहली बार 1968 में सुप्रीम कोर्ट गई थी, जब यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश मिला; 2006 में प्रतिकूल फैसले के बाद अवमानना और उपचारात्मक याचिकाएं दायर हुईं, और जनवरी 2022 में ओडिशा द्वारा दायर मूल वाद अब तक लंबित है।