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पंचायत चुनाव नोटिस से कोटिया विवाद भड़का, ओडिशा सतर्क

विवादित कोटिया क्षेत्र के गांवों को शामिल करते आंध्र प्रदेश की पंचायत चुनाव अधिसूचना से ओडिशा के साथ नया विवाद खड़ा हो गया है। ओडिशा सरकार ने कहा है कि वह पड़ोसी राज्य की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए अधिकारियों को तैनात करेगी। विपक्षी बीजेडी ने कोटिया के निवासियों के हितों की रक्षा के लिए कार्रवाई की मांग की।

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भुवनेश्वर: विवादित कोटिया क्षेत्र के गांवों को शामिल करते आंध्र प्रदेश की पंचायत चुनाव अधिसूचना से ओडिशा के साथ नया विवाद खड़ा हो गया है। राज्य सरकार ने कहा है कि वह पड़ोसी राज्य की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए अधिकारी तैनात करेगी।

कोरापुट जिले के कोटिया गांवों पर दशकों से ओडिशा और आंध्र प्रदेश दोनों दावा करते हैं, और दोनों राज्यों के बीच प्रशासनिक नियंत्रण और योजनाओं को लेकर बार-बार टकराव हुआ है। आंध्र का इलाके को अपनी पंचायत चुनाव प्रक्रिया में शामिल करने से यह विवाद फिर उभरा।

ओडिशा सरकार ने कहा कि वह आंध्र की गतिविधियों की निगरानी करेगी और अपनी स्थिति की रक्षा के लिए कदम उठाएगी। विपक्षी बीजू जनता दल ने मांग की कि राज्य कोटिया के निवासियों के हितों की रक्षा के लिए सख्ती से कार्रवाई करे।

बीजेडी नेताओं ने कहा कि महानदी जल विवाद और कोटिया में ओडिशा के हितों की रक्षा होनी चाहिए, और आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ भाजपा दोनों मामलों में नरम रुख अपना रही है। पार्टी के प्रवक्ता लेनिन महांति ने आरोप लगाया कि भाजपा के एमएमडीआर संशोधन अधिनियम, 2026 के समर्थन से ओडिशा को खनिज युक्त भूमि से राजस्व का नुकसान हुआ। ये दावे पार्टी के हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई।

ओडिशा सरकार मानती रही है कि कोटिया उसका क्षेत्र है। इस बार-बार उठने वाले विवाद के कारण गांवों में विकास कार्यों और सेवा वितरण को लेकर परस्पर विरोधी दावे बने रहे हैं। दोनों राज्य इस मुद्दे पर पहले भी अदालत और केंद्र का रुख कर चुके हैं।