नई दिल्ली: भारत में ही एआई का काम चलाना चाहने वाली कंपनियों को 2027 की शुरुआत से नई जगह मिलेगी. डेटा सेंटर कंपनी एसटीटीजीडीसी ने बुधवार को बताया कि भारत की एआई क्लाउड कंपनी नेसा ने अपनी बड़ी जीपीयू तैनाती के लिए उसके नोएडा कैंपस को चुना है.
एसटीटी नोएडा 2 सुविधा 9,000 जीपीयू तक की क्षमता संभालेगी और वहां नेसा का वेलोसिस एआई क्लाउड प्लेटफॉर्म चलेगा. पहला चरण 2027 की पहली तिमाही में शुरू होने की उम्मीद है. यह सुविधा हाई-डेंसिटी एआई ट्रेनिंग और इन्फरेंस के लिए बनाई जा रही है, ऐसा दोनों कंपनियों ने कहा.
मकसद सीधा है: जहां उपयोगकर्ता और डेटा हैं, उसी के पास प्रोडक्शन एआई का काम चल सकेगा, जिससे विलंब का अंदाजा रहेगा और डेटा देश में ही रहेगा.
'भारत की एआई महत्वाकांक्षा सिर्फ कंप्यूट की उपलब्धता पर निर्भर नहीं है; जटिल और कंप्यूट-गहन कामों को बड़े पैमाने पर संभालने वाली डिजिटल बुनियादी ढांचे की जरूरत है,' एसटीटीजीडीसी के भारत प्रमुख बिमल खंडेलवाल ने कहा. नेसा की विशेष एआई क्षमता और एसटीटीजीडीसी की बुनियादी ढांचा विशेषज्ञता साथ आने से कंपनियों को प्रयोग से असली इस्तेमाल की ओर बढ़ने में मदद मिलेगी, ऐसा उन्होंने कहा.
नेसा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी शरद सांघवी ने कहा कि कंपनी लंबे समय के नजरिए से बन रही है. ग्राहक चाहते हैं कि उनके पास ऐसी क्षमता हो जिसकी वे योजना बना सकें, भरोसेमंद कामकाज हो और काम बढ़ने पर विस्तार की जगह रहे, ऐसा उन्होंने कहा.
भारत के एआई बुनियादी ढांचे के लिए यह सक्रिय हफ्ता रहा. इससे पहले सबमर इंडिया और बीएसएनएल टावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2026 में संप्रभु, एआई-तैयार डेटा सेंटरों के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए. इसमें जीपीयू-एज-ए-सर्विस और 20 मेगावाट तक की परियोजनाएं शामिल हैं.
घरेलू एआई क्षमता मांग की रफ्तार पकड़ पाएगी या नहीं, नोएडा की यह तैनाती उसकी परीक्षा होगी.