नई दिल्ली : तिरंगा फहराने के लिए किसी अनुमति की जरूरत नहीं है, यह अखिल भारतीय विद्यार्थी संगठन (एआईएसए) की अध्यक्ष नेहा बोरा ने गुरुवार को दिल्ली उच्च न्यायालय में कहा।
विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के सामने "शांति बनाए रखने" के लिए व्यक्तिगत बांड भरने की नोटिस दिल्ली पुलिस ने बोरा को जारी की थी। उन्होंने इस नोटिस को चुनौती दी है।
बोरा ने नोटिस रद्द करने और इस मामले में कोई जबरन कार्रवाई न करने के निर्देश देने की मांग की। न्यायमूर्ति सुब्रह्मण्यम प्रसाद के सामने सुनवाई हुई।
दिल्ली पुलिस ने याचिका का विरोध किया। पुलिस का तर्क था कि बोरा को पहले उचित पुनर्विलोकन अदालत में जाना चाहिए था।
बोरा के वकील के अनुरोध पर अदालत ने सुनवाई टाल दी। अदालत शुक्रवार (23 अक्टूबर) की शाम अपना आदेश सुनाएगी।
नोटिस में जांच की अवधि में शांति बनाए रखने के लिए एक जमानतदार के साथ व्यक्तिगत बांड भरने का निर्देश था। बोरा ने नोटिस रद्द करने की मांग की है। तिरंगा फहराना हर नागरिक का हक है और इसके लिए प्रशासनिक अनुमति की जरूरत नहीं, ऐसी दलील उनकी तरफ से दी गई।
राजधानी में पिछले कुछ दिनों से छात्र और नागरिक संगठन मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) को लेकर चुनाव आयोग पर दबाव बना रहे हैं। शुक्रवार (23 अक्टूबर) को देशव्यापी प्रदर्शन का आह्वान किया गया है, जिसका नेतृत्व अर्थशास्त्री परकाल प्रभाकर, अभिनेता-कार्यकर्ता प्रकाश राज और कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके जैसे लोग करेंगे। इस प्रदर्शन में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी की जाएगी।
अखिल भारतीय विद्यार्थी संगठन देशभर के छात्रों का संगठन है और बोरा इसकी अध्यक्ष हैं। मतदाता सूची से नाम हटाए जाने की कार्रवाई के खिलाफ उन्होंने और अन्य संगठनों ने आवाज उठाई है।
(सूत्र के मुताबिक यह जानकारी पीटीआई ने दी है।)