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नीट-यूजी पेपर लीक : आरोप तय करने पर फैसला 18 नवंबर तक सुरक्षित

दिल्ली की एक अदालत ने नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले में 14 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने पर अपना फैसला गुरुवार को सुरक्षित रख लिया और उसे 18 नवंबर को सुनाएगी. सीबीआई का आरोप है कि लीक हुए सवाल नांदेड़ के एक घर में उम्मीदवारों को दिए गए.

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नई दिल्ली: सार्वजनिक परीक्षाओं में गड़बड़ी के लिए बनी फास्ट-ट्रैक अदालत 18 नवंबर को तय करेगी कि नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले के 14 आरोपियों पर मुकदमा चलाया जाए या नहीं. विशेष सीबीआई न्यायाधीश अजय गुप्ता ने गुरुवार को एजेंसी और अंतिम चार्जशीट किए गए आरोपी के वकील की दलीलें सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रख लिया.

सीबीआई ने जुलाई में 13 आरोपियों के खिलाफ मुख्य चार्जशीट दाखिल की थी और अगस्त में उस पर संज्ञान लिया गया था. पुणे के शेशराव बजरंग सूर्यवंशी की 2 सितंबर को गिरफ्तारी के बाद उनके खिलाफ पूरक चार्जशीट दाखिल हुई. एजेंसी की ओर से वरिष्ठ लोक अभियोजक वी. के. पाठक पेश हुए.

सीबीआई के मुताबिक सूर्यवंशी सह-आरोपी शुभम खैरनार के करीबी सहयोगी थे और उन्होंने खैरनार के साथ आपराधिक साजिश रचकर परीक्षा से पहले उम्मीदवारों के लिए नीट-यूजी 2026 के कथित लीक हुए सवालों का इंतजाम किया और उनसे तथा उनके परिवारों से पैसे वसूले.

एजेंसी का दावा है कि उम्मीदवारों को नांदेड़ के एक घर में लाया गया, जहां उन्हें लीक हुए सवाल दिए गए. सीबीआई ने अदालत को बताया कि भुगतान की गारंटी के तौर पर उम्मीदवारों के मूल दस्तावेज और शैक्षणिक प्रमाणपत्र जमा कर लिए गए थे.

मुख्य चार्जशीट में नामजद अन्य आरोपी मनीषा मंधारे, मनीषा संजय हवालदार, मनीषा वाघमारे, प्रह्लाद कुलकर्णी, शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर, डॉ. मनोज शिरुरे, तेजस हर्षद शाह, शुभम खैरनार, धनंजय लोखंडे, यश यादव, मंगीलाल बिवाल, दिनेश बिवाल और विकास बिवाल हैं.

सीबीआई ने लीक की जांच के लिए मई 2026 में मामला दर्ज किया था. एजेंसी ने कहा है कि गिरफ्तार आरोपी और उसके साथियों के खिलाफ आगे की जांच अहम दौर में है.

आरोप तय करना वह चरण है जब अदालत तय करती है कि मुकदमा शुरू करने के लिए पर्याप्त सामग्री है या नहीं. आदेश सुरक्षित रखने का मतलब दोषसिद्धि नहीं है. सभी आरोपी तब तक आरोपी ही हैं जब तक दोषी न ठहराए जाएं.

नीट-यूजी देश में स्नातक मेडिकल सीटों की एकमात्र प्रवेश परीक्षा है, जिसे हर साल लाखों उम्मीदवार देते हैं. परीक्षा के संचालन में कोई भी गड़बड़ दाखिलों और उम्मीदवारों के करियर पर सीधा असर डालती है.

अदालत ने बाकी 13 आरोपियों पर दलीलें पहले की सुनवाई में सुन ली थीं. अगर 18 नवंबर को आरोप तय होते हैं तो जिन पर मुकदमा चलेगा, उनके खिलाफ सुनवाई शुरू होगी और इस चरण में जो बरी किए जाएंगे वे मामले से बाहर हो जाएंगे.