नवी मुंबई: तोड़फोड़ का आरोप टिक नहीं पाया। मंगलवार को कोर्ट ने कोपरखैरणे के तिलक इंजीनियरिंग कॉलेज में हुए छात्र आंदोलन के मामले में गिरफ्तार 12 कार्यकर्ताओं को बरी कर दिया। यह मुकदमा 15 साल चला।
आंदोलन 2011 में हुआ था। छात्रों के हक और स्कॉलरशिप तथा दाखिले की प्रक्रिया में आ रही दिक्कतों के खिलाफ रिपब्लिकन पार्टी की बहुजन विद्यार्थी परिषद ने यह आंदोलन खड़ा किया था। आंदोलन के दौरान कॉलेज में तोड़फोड़ का आरोप लगाकर 12 कार्यकर्ताओं के खिलाफ केस दर्ज हुआ था।
मंगलवार को कोर्ट ने सभी को बरी कर दिया। इनमें डॉ. संदीप माइकनर, संकेत डोके, सचिन कटारे, एडवोकेट जय गायकवाड़, राकेश ओव्हाळ, सुनील कचरे, रामराव बोधडे, सूरज सरवदे, प्रितेश भगत, विक्रम गायकवाड़, मुकेश जाधव और बिजेश वैद्य शामिल हैं।
लंबी सुनवाई के बाद यह फैसला आया। आंदोलन के बाद तोड़फोड़ का केस दर्ज हुआ था और वह सालों तक कोर्ट में चलता रहा। कॉलेज में तोड़फोड़ का आरोप बना रहा, लेकिन आखिर में कोर्ट ने उसे साबित नहीं माना।
छात्रों के मुद्दे पर शुरू हुआ यह विवाद कॉलेज से कोर्ट तक पहुंचा। स्कॉलरशिप और दाखिले की प्रक्रिया में दिक्कतें आंदोलन की मुख्य वजह थीं।
15 साल बाद 12 कार्यकर्ताओं की बरी के साथ मामला बंद हुआ।