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त्योहारों के नाम पर पश्चिमी उपनगरों में बैनरबाजी, 'बैनर-मुक्त करो' की मांग

दशहरा और दिवाली की शुभकामनाओं के नाम पर वांद्रे से दहिसर तक राजनीतिक बोर्डों की भरमार है। सार्वजनिक जगह, शहर की सुंदरता और यातायात सुरक्षा का सवाल फिर उठा है और बैनर-मुक्त उपनगर की मांग हो रही है।

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मुंबई: दशहरा और दिवाली की शुभकामनाओं के नाम पर वांद्रे से दहिसर तक राजनीतिक बैनरों की बाढ़ आ गई है। पश्चिमी एक्सप्रेस हाईवे, एस. वी. रोड और लिंक रोड के अहम रास्ते, सिग्नल, फुटपाथ, चौक और सार्वजनिक जगहें इन बोर्डों से भर गई हैं।

गोरेगांव, मालाड, कांदिवली, बोरिवली, दहिसर, अंधेरी और जोगेश्वरी समेत पश्चिमी उपनगरों के कई हिस्सों में सभी दलों के नेता, स्थानीय पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं के शुभकामना बोर्ड लगे हैं। कई जगह एक ही इलाके में अलग-अलग पार्टियों, गुटों और नेताओं के कई बोर्ड एक-दूसरे के साथ चमक रहे हैं। इससे कुछ चौक और रास्ते बोर्डों से पटे नजर आते हैं।

शुभकामनाएं देकर लोगों तक पहुंचने की राजनीतिक जद्दोजहद इन बोर्डों में दिखती है, लेकिन इस बैनरबाजी से सार्वजनिक जगहों का इस्तेमाल, शहर की सुंदरता और यातायात की सुरक्षा का सवाल फिर चर्चा में आ गया है। बैनरबाजी से शहर बदसूरत होने पर नागरिकों ने नाराजगी जताई है।

नगर निगम प्रशासन सभी बैनर हटाकर पश्चिमी उपनगर को बैनर-मुक्त करे, यह मांग जोर पकड़ने लगी है। गैरकानूनी बोर्डों पर कार्रवाई की जिम्मेदारी नगर निगम की है। वॉचडॉग फाउंडेशन के ट्रस्टी एड. गॉडफ्रे पिमेंटा ने कहा है कि नगर निगम प्रशासन और संबंधित एजेंसियां सार्वजनिक जगहों के बोर्डों की जांच कर जरूरी कार्रवाई करें।

"त्योहारों के मौके पर शुभकामनाएं देने के उत्साह पर ऐतराज नहीं है। मगर सार्वजनिक जगहों के इस्तेमाल में नियमों का पालन जरूरी है। राजनीतिक दलों या सामाजिक संस्थाओं के लगाए बोर्डों पर लागू इजाजत की शर्तों की जांच होनी चाहिए," उन्होंने कहा।