मुंबई: शहर की हवा कुछ समय के लिए दिल्ली से भी खराब होने के बाद बॉम्बे हाई कोर्ट ने मुंबई की धुंध को 'आपातकालीन' स्थिति कहा है और धूल तथा वाहनों के उत्सर्जन को घटाने के लिए स्पष्ट कार्य योजना पेश करने का आदेश दिया है।
अदालत की टिप्पणी के मुताबिक, निर्माण कार्य से उड़ने वाली धूल और वाहनों का उत्सर्जन मुंबई में प्रदूषण के मुख्य कारण हैं। इस पर तुरंत कदम उठाने की जरूरत अदालत ने रेखांकित की।
मुंबई में पिछले कुछ दिनों में हवा की गुणवत्ता गिरी है और कुछ समय दिल्ली से भी खराब दर्ज हुई। दिल्ली में भी एम्स इलाके का वायु गुणवत्ता सूचकांक 255, यानी 'खराब' श्रेणी में था, ऐसा केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों से पता चलता है।
सर्दियों में तापमान गिरने और हवा की रफ्तार कम होने से प्रदूषक कण हवा में तैरते रहते हैं और धुंध बढ़ती है। निर्माण कार्य, यातायात और औद्योगिक उत्सर्जन से हालत और बिगड़ती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, प्रदूषित हवा से सांस की बीमारी, अस्थमा और दिल की बीमारी का खतरा बढ़ता है। छोटे बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को खास सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
अदालत में पेश कार्य योजना के उपायों पर अमल कैसे होगा, अब उस पर नजर है। निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के नियम सख्त करने और वाहन उत्सर्जन की जांच बढ़ाने की जरूरत विशेषज्ञ बताते हैं।
निर्माण स्थलों पर धूल रोकने के लिए पानी का छिड़काव और ढकाव जरूरी होता है, लेकिन कई जगह नियमों का पालन नहीं होता। वाहनों के उत्सर्जन की जांच और पुराने वाहनों पर कार्रवाई भी प्रदूषण घटाने में मदद करती है। नागरिक सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करके और जहां संभव हो पैदल चलकर अपना हिस्सा घटा सकते हैं।