प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों ने 12 प्रमुख मांगें उठाई हैं। वे महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) की परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं। इनमें अंकों में अंतर, चयन प्रक्रिया की खामियां और पेपर लीक का मामला शामिल है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने छात्र और परीक्षार्थी प्रतिनिधियों से बात की और उनकी मांगों को गंभीरता से लिया है। हर मांग पर अब तक हुई कार्रवाई इस प्रकार है।
मांग 1
MPSC के अध्यक्ष, सचिव और पूरी कार्यकारिणी का इस्तीफा लिया जाए, जिम्मेदारी तय की जाए और उन्हें सह-आरोपी बनाया जाए।
सरकार का जवाब: मुख्यमंत्री ने पेपर लीक के लिए जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया। उन्होंने कहा कि संवैधानिक प्रक्रिया का पालन जरूरी है, इसलिए यह आसान नहीं है। फिर भी उन्होंने जिम्मेदारी तय करने की बात कही। साथ ही उन्होंने अपील की कि इस मामले को राजनीतिक रंग न दिया जाए।
मांग 2
अभिजीत लेंडवे के कार्यकाल में हुई MPSC परीक्षाओं का स्वतंत्र फॉरेंसिक ऑडिट कराया जाए।
सरकार का जवाब: मुख्यमंत्री ने इस मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) को आदेश दिए हैं। SIT शिकायतें दर्ज कर संबंधित लोगों के बयान ले रही है, और पुलिस भी जांच कर रही है।
मांग 3
राज्य सेवा मुख्य परीक्षा 2025, कृषि सेवा परीक्षा 2024 और FSO/वन परीक्षा में अंकों के अंतर और जांच की अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच की जाए।
सरकार का जवाब: मुख्यमंत्री ने इन परीक्षाओं से जुड़े छात्र और परीक्षार्थी प्रतिनिधियों से मुलाकात कर उनकी दिक्कतें सुनीं। उन्होंने तुरंत री-चेकिंग, सत्यापन और जहां जरूरी हो वहां दोबारा जांच के निर्देश दिए हैं।
मांग 4
ग्रुप-B परीक्षा पर उठे आक्षेपों का MPSC आठ दिनों में स्पष्टीकरण दे और फॉरेंसिक ऑडिट के जरिए गड़बड़ियों की जांच कराए।
सरकार का जवाब: ग्रुप-B और ग्रुप-C परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की जांच जारी है। छात्र प्रतिनिधियों के जरिए दिए गए सबूतों पर भी पुलिस आरोप तय करने के लिए विचार कर रही है।
मांग 5
मुंबई क्राइम ब्रांच की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
सरकार का जवाब: जांच अभी जारी है और संबंधित जानकारी गोपनीय रखना जरूरी है। इसलिए मामला सुलझने तक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की जा सकती।
मांग 6
अभिजीत लेंडवे, गोपाल मराठे और विश्वेश्वर नकाते के प्रशासनिक सेवाकाल की गहन जांच कर उसकी जानकारी सार्वजनिक की जाए।
सरकार का जवाब: अदालत ने इन तीनों आरोपियों को हिरासत में भेजा है। उनके खिलाफ अलग-अलग पुलिस और न्यायिक जांच चल रही है।
मांग 7
प्रवीण पाटिल और मयूर ठाकरे के अलावा पेपर लीक में शामिल अन्य एजेंटों और व्यक्तियों की जांच की जाए।
सरकार का जवाब: इन आरोपियों के साथ और कौन-कौन लोग इस गड़बड़ी में शामिल थे, इसकी पुलिस गहराई से जांच कर रही है।
मांग 8
MPSC की अन्य परीक्षाओं के नतीजों पर छात्रों के संदेहों की पारदर्शी जांच की जाए।
सरकार का जवाब: मुख्यमंत्री ने कहा कि छात्रों की यह मांग सही है। उन्होंने कहा कि पारदर्शी और संदेह-मुक्त परीक्षा हर छात्र का अधिकार है। उन्होंने यह भी बताया कि वी. राधा की अध्यक्षता वाला टास्क फोर्स परीक्षा प्रक्रिया की निगरानी बढ़ाने के लिए जो उपाय सुझाएगा, सरकार उन्हें तुरंत लागू करने के पक्ष में है।
मांग 9
स्टेनोग्राफर (लघुलेखक) का पद फिर से शुरू किया जाए।
सरकार का जवाब: छात्रों के आंदोलन और मांगों पर सहानुभूति से विचार करते हुए राज्य सरकार ने संबंधित उम्मीदवारों को एक साल की अस्थायी मोहलत दी है। मुख्यमंत्री ने एक प्रतिनिधिमंडल से कहा कि सरकार स्टेनोग्राफर पदों के विज्ञापन निकालने और इन उम्मीदवारों को अन्य सरकारी सेवाओं में समायोजित करने पर विचार कर रही है।
मांग 10
खेल, दिव्यांग और अन्य विशेष आरक्षण कोटे से हुए चयनों की समीक्षा और गहन सत्यापन किया जाए।
सरकार का जवाब: कुछ चयनों में फर्जी प्रमाणपत्रों की आपत्तियां सामने आने के बाद राज्य सरकार ने इसे गंभीरता से लिया है। ऐसी गड़बड़ियां ईमानदार छात्रों के मौके छीन लेती हैं, इसलिए इनके खिलाफ जरूरी कार्रवाई जारी है।
मांग 11
आगामी सभी परीक्षाएं और साक्षात्कार पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से लिए जाएं।
सरकार का जवाब: मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस प्रतियोगी परीक्षा के छात्रों की हर मांग पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। सभी उम्मीदवारों को न्याय और पारदर्शी परीक्षा प्रक्रिया मिले, इस पर वे दृढ़ हैं। संबंधित एजेंसियों को जरूरी निर्देश भी जारी किए गए हैं।
मांग 12
MPSC की गोपनीयता, विश्वसनीयता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
सरकार का जवाब: हाल की गड़बड़ियों को देखते हुए मुख्यमंत्री ने जोर दिया कि लोक सेवा आयोग जैसी संवेदनशील संस्था की गोपनीयता, विश्वसनीयता और पारदर्शिता कायम रहनी चाहिए। जरूरी और तत्काल सुधारों की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। संस्था पर भरोसा मजबूत करने के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।

