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जवानों के साथ दिवाली मनाने बस्तर जा रहे मोदी, बोले- नक्सलवाद खत्म हो चुका

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिवाली के दिन बस्तर में सुरक्षाबलों के जवानों के साथ त्योहार मनाएंगे. रविवार सुबह उन्होंने खुद इसकी जानकारी दी. उन्होंने बस्तर इलाके को नक्सलवाद से मुक्त बताया.

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नई दिल्ली: दिवाली के दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी छत्तीसगढ़ के बस्तर में होंगे. वहां वे सुरक्षाबलों के जवानों के साथ त्योहार मनाएंगे. रविवार सुबह एक्स पर उन्होंने खुद यह जानकारी दी.

"दीपावली के पावन अवसर पर बस्तर जा रहा हूं. कल तक जहां नक्सलियों का कहर था, वहां आज विकास की बहार है," मोदी ने हिंदी में लिखा. अंग्रेजी पोस्ट में भी यही बात दोहराई गई — जहां कभी नक्सलवाद का दबदबा था, वहां अब विकास हो रहा है. यह दावा मोदी का है, इसके पीछे प्रशासन की कोई अलग रिपोर्ट सामने नहीं आई है.

जवानों के बलिदान का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा, "अपने वीर सुरक्षाकर्मियों के बलिदान, त्याग और राष्ट्र के प्रति समर्पण को मैं नमन करने जा रहा हूं." उन्होंने जवानों की सेवा और तपस्या के लिए आदर जताया.

बस्तर में दिवाली के दिन जाना प्रधानमंत्री के लिए नया नहीं है. छत्तीसगढ़ के इस इलाके में सुरक्षा एजेंसियों के साथ त्योहार मनाने की परंपरा वे पहले भी निभा चुके हैं. इस बार उनका सुर अलग है — बस्तर में नक्सलवाद के सवाल को खत्म बताया गया है.

भाजपा के प्रदेश नेताओं ने दौरे का स्वागत किया है. उनका कहना है कि सुरक्षाबलों के बीच त्योहार मनाना सरकार के भरोसे का संकेत है.

प्रधानमंत्री के दौरे को देखते हुए बस्तर में सुरक्षा बढ़ा दी गई है. दिवाली के दिनों में इलाके में आवाजाही बढ़ती है और भीड़ भी जुटती है, इसलिए सुरक्षा एजेंसियों को ज्यादा चौकस रहना है.

बस्तर रवाना होने से पहले मोदी ने देशवासियों को दिवाली की शुभकामनाएं दीं. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी बधाई दी. राष्ट्रपति ने अपने संदेश में भगवान राम के अयोध्या लौटने का जिक्र करते हुए दिवाली का सांस्कृतिक अर्थ रेखांकित किया.

देशभर के मंदिरों में सुबह से श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी. दिल्ली में भी सुरक्षा बढ़ाई गई है. एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के मुताबिक 15 जिलों में पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं, बाजारों, धार्मिक स्थलों, मेट्रो स्टेशनों और बस अड्डों पर खास नजर रखी जा रही है.

बस्तर दौरे का कार्यक्रम अभी जारी नहीं हुआ है. किस वक्त वे पहुंचेंगे और किस चौकी या शिविर में जाएंगे, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.