मुंबई: 23 अक्टूबर को वोट पड़े थे और 28 स्नातक व शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की गिनती करीब दो दिन चली. गुरुवार को आखिरी नतीजा आया, तब भाजपा की अगुवाई वाले एनडीए के हिस्से 28 में से 16 सीटें आईं. अलग-अलग नतीजों के मुताबिक भाजपा अकेले 13 सीटें जीती.
कांग्रेस का खाता सिर्फ एक सीट पर खुला, वह भी महाराष्ट्र के नागपुर स्नातक क्षेत्र में. कर्नाटक की चारों सीटें पार्टी हार गई.
इन नतीजों का केंद्र उत्तर प्रदेश रहा. समाजवादी पक्ष ने वहां पांच सीटें जीतीं, जिनमें वाराणसी की दो सीटें शामिल हैं. अगले साल राज्य में विधानसभा चुनाव हैं, इसलिए इन जीतों का राजनीतिक वजन बढ़ गया है.
बिहार में प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने विधान परिषद में पहली जीत दर्ज की. इसी नतीजे में पांच मौजूदा एमएलसी भी हार गए, नतीजों से यह साफ है.
महाराष्ट्र की पांच सीटों में महाविकास आघाडी ने तीन जीतीं. नागपुर स्नातक पर कांग्रेस के अभिजीत वंजारी जीते, पुणे स्नातक और छत्रपति संभाजीनगर स्नातक सीटें राकांपा (शरदचंद्र पवार) गुट ने लीं. भाजपा के कौस्तुभ गावडे पुणे शिक्षक क्षेत्र से और शिवसेना के किरण सरनाईक अमरावती शिक्षक क्षेत्र से जीते.
मतदान कागज की पर्चियों पर हुआ था. गिनती के दौरान कई जगह हंगामा, आरोप और विरोध के मामले सामने आए. नागपुर में गिनती शुरू होने से नतीजा आने तक 41 घंटे से ज्यादा लगे.
राकांपा नेता प्रफुल पटेल ने पार्टी के अकेले उम्मीदवार के हारने के बाद पार्टी की प्राथमिकताओं और संगठनात्मक ढांचे की तुरंत समीक्षा की मांग की.
विधान परिषद में भाजपा सबसे बड़ा दल है. इस चुनाव से ऊपरी सदन का गणित बदला है और अगले साल के विधानसभा चुनाव से पहले यह हर पार्टी की ताकत नापने का पैमाना बन गया है. शिक्षक और स्नातक क्षेत्र संगठन की असली ताकत का पैमाना माने जाते हैं, क्योंकि यहां कार्यकर्ताओं को घर-घर जाकर वोटर जोड़ने पड़ते हैं.