शिलांग: करीब आठ साल बाद यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी (UDP) ने मेघालय सरकार से नाता तोड़ लिया है। पार्टी की सेंट्रल एग्जीक्यूटिव कमेटी ने मंगलवार को समर्थन वापस लेने का फैसला किया।
महासचिव तितोस्टारवेल चाइने ने पत्रकारों से कहा, "कमेटी ने सिफारिश की है कि हमारे इकलौते विधायक सरकार से समर्थन वापस लें। इस बारे में मुख्यमंत्री को चिट्ठी भेजी जाएगी।"
पार्टी अध्यक्ष और इकलौते विधायक मेटबा लिंगदोह ने 31 अक्टूबर को मंत्री पद छोड़ दिया था। बैठक में उन्होंने बताया कि इस्तीफा मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा को सौंप दिया गया है।
चाइने के मुताबिक, "जब अध्यक्ष और इकलौते विधायक ने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया, तो कमेटी को लगा कि सरकार को समर्थन जारी रखने की कोई वजह नहीं बची।" उन्होंने साफ किया कि इस्तीफे के पीछे कोई दबाव नहीं था।
UDP के 12 में से आठ विधायक सितंबर में भाजपा में चले गए थे, जबकि तीन पिछले महीने नेशनल पीपल्स पार्टी (NPP) में शामिल हुए। विधानसभा अध्यक्ष ने दोनों विलय को मान्यता दे दी, जिससे पार्टी की ताकत 12 से एक रह गई।
UDP 2018 में मेघालय डेमोक्रेटिक अलायंस बनने के समय से साथ थी। 2018 में छह सीटें जीतने के बाद 2023 में उसकी ताकत 12 हो गई थी और वह राज्य की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बन गई थी।
मौजूदा संकट की जड़ सितंबर 2025 के कैबिनेट फेरबदल में है। लिंगदोह ने मुख्यमंत्री से पॉल लिंगदोह और किरमेन शिल्ला को कैबिनेट से हटाने की सिफारिश की थी। इससे पार्टी में नाराजगी पैदा हुई। पॉल लिंगदोह ने सोमवार को मंत्री पद की शपथ ली।
चाइने का कहना है कि सरकार पर कोई असर नहीं पड़ेगा। NPP के अकेले 36 विधायक हैं और 11 विधायकों तथा HSPDP के समर्थन से सरकार चलती रहेगी। 60 सदस्यीय सदन में भाजपा के 10 विधायक हैं।
अब UDP उन इलाकों में संगठन खड़ा करने पर ध्यान देगी, जहां उसका कोई विधायक या जिला परिषद सदस्य नहीं है।