शिलांग: मेघालय की क्षेत्रीय यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी (यूडीपी) के तीन और विधायक सत्तारूढ़ नेशनल पीपल्स पार्टी (एनपीपी) में विलय के लिए तैयार हैं. इससे पहले पार्टी के आठ विधायक भाजपा में जा चुके हैं.
सोमवार को यूडीपी ने वेस्ट शिलांग के पॉल लिंगदोह, मॉकिरवाट के रेनिक्टन लिंगदोह तोंगखार और मूकैयाव के नुजोर्की सुंगोह को पार्टी से निकाल दिया. इन तीनों ने विधानसभा अध्यक्ष थॉमस ए. सांगमा को एनपीपी में विलय का आवेदन और प्रस्ताव सौंपा था.
अध्यक्ष ने कहा कि वे कानूनी राय लेकर कुछ दिनों में फैसला बताएंगे. उन्होंने आठ विधायकों के भाजपा में विलय को मान्य किया, लेकिन तीन विधायकों के एनपीपी में विलय को महज औपचारिकता न मानने की चेतावनी दी.
मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा के नेतृत्व वाली एनपीपी मेघालय लोकतांत्रिक गठबंधन सरकार चलाती है. यूडीपी से आठ विधायकों के भाजपा में जाने के बाद 10 विधायकों के साथ भाजपा गठबंधन का दूसरा सबसे बड़ा घटक बन गई है.
तीन विधायकों के एनपीपी में जाने पर 60 सदस्यीय विधानसभा में एनपीपी की ताकत 36 तक पहुंच सकती है. यूडीपी अध्यक्ष और बिजली मंत्री मेटबाह लिंगदोह कुछ दिनों में पार्टी के अकेले विधायक रह जाएंगे.
वहीं, भाजपा के वरिष्ठ नेता ए.एल. हेक ने स्पष्ट किया कि उन्हें मंत्रिमंडल में जगह नहीं चाहिए. उन्होंने कहा कि उन्हें मेघालय सरकार में कोई बदलाव होने की उम्मीद नहीं है.
पिछले महीने 12 में से आठ विधायकों के भाजपा में जाने से यूडीपी को बड़ा झटका लगा था.
आठ विधायकों के जाने के बाद यूडीपी की विधानसभा में ताकत 12 से चार रह गई थी. अब तीन और विधायक जाने पर पार्टी के पास एक ही विधायक बचेगा. सत्तारूढ़ गठबंधन का संख्या बल बढ़ने से आगामी सत्र में सरकार को बहुमत की चिंता नहीं रहेगी, ऐसा विश्लेषक कहते हैं. 'अध्यक्ष का कानूनी राय के बाद लिया गया फैसला सबको मंजूर होगा,' ऐसा यूडीपी ने कहा.