इंफाल: मणिपुर में जारी हिंसा के बीच दो नागरिक संगठनों ने केंद्र और राज्य सरकार के सामने नई मांगें रखी हैं।
यूनाइटेड नागा काउंसिल (यूएनसी) ने नागा बहुल इलाकों से असम राइफल्स को तत्काल हटाने की मांग की है। उसका आरोप है कि 17 अक्टूबर को कमजोंग जिले के अवोंतांग गांव में हुई झड़प के दौरान अंधाधुंध गोलाबारी हुई। उसने केंद्र से कहा है कि इस बल की जगह सीमा सुरक्षा बल जैसा "तटस्थ" बल तैनात किया जाए।
एक बयान में यूएनसी ने आरोप लगाया कि म्यांमार स्थित कुकी नेशनल आर्मी-बर्मा के उग्रवादियों और स्थानीय नागा ग्राम रक्षकों के बीच झड़प के दौरान असम राइफल्स ने भारी गोलाबारी की और उग्रवादियों की मदद की। उसने कहा कि 18 अक्टूबर को हालात और बिगड़े, जब उग्रवादियों ने कथित तौर पर सीमा पार कर पिलोंग और स्किपे नागा गांवों में आग लगा दी, जिससे सैकड़ों लोग बेघर हो गए।
काउंसिल ने कमजोंग के एसपी के तबादला आदेश वापस लेने की भी मांग की और आरोप लगाया कि 11 असम राइफल्स के जवानों ने नागा ग्राम रक्षक एन चिथुंग को अगवा कर प्रताड़ित किया, जो अपने गांव की रक्षा कर रहा था।
अलग से, इनपुई, लियांगमाई, रोंगमेई और जेमे समुदायों का प्रतिनिधित्व करने वाली जॉइंट ट्राइब्स काउंसिल ने 19 अक्टूबर को सुनुरोक उयोक, खोंगबल तांगखुल में तीन मैतेई नागरिकों की हत्या की निंदा की। मृतकों की पहचान अरुबाम रोनिल (30), लैरेनलक्पम इनाओबी (50) और क्षेत्रिमयुम सुशील (25) के रूप में की गई।
काउंसिल ने आरोप लगाया कि सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस (एसओओ) के तहत काम कर रहे कुकी उग्रवादियों ने हमला किया, और तत्काल, स्वतंत्र व निष्पक्ष जांच, निर्धारित कैंपों की जांच और एसओओ व्यवस्था की समीक्षा की मांग की। उसने कहा कि एसओओ जवाबदेही से बचने का ढाल नहीं बनना चाहिए।