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मणिपुर में राष्ट्रपति शासन की मांग; खरगे का हमला, आज राज्यव्यापी धरना

मणिपुर के संकट को 'राजनीतिक' बताते हुए कुकी-ज़ो महिला मंच ने राष्ट्रपति शासन फिर लागू करने और विधानसभा वाले अलग केंद्रशासित प्रदेश की मांग की। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सरकार पर नाकामी का आरोप लगाया। खोंगबन सुनुरोक हत्याकांड के विरोध में गुरुवार को राज्यव्यापी धरना है।

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इंफाल: मणिपुर का लंबा संघर्ष सिर्फ और सुरक्षा बल भेजने से नहीं सुलझेगा, यह राजनीतिक मुद्दा है, यह कहते हुए कुकी-ज़ो महिला मंच ने बुधवार को राष्ट्रपति शासन फिर लागू करने की मांग की।

नई दिल्ली में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में मंच ने समुदाय के लिए विधानसभा वाले अलग केंद्रशासित प्रदेश की मांग दोहराई। कुकी-ज़ो काउंसिल के प्रवक्ता गिन्ज़ा वुआलज़ोंग ने कहा, 'हमारी राजनीतिक मांग सिर्फ राजनीतिक नहीं है। यह हमारे अस्तित्व का सवाल है। हम जीना चाहते हैं।'

वुआलज़ोंग ने दावा किया कि मौजूदा राज्य सरकार के कार्यकाल में समुदाय के 32 लोग मारे गए, जबकि पिछले राष्ट्रपति शासन के दौरान हिंसा में एक भी जान नहीं गई। मंच ने NSCN-IM पर लगे हमलों की जांच, युद्धविराम उल्लंघन पर कार्रवाई, मृतकों के परिवारों को मुआवजा और चुनिंदा NIA कार्रवाई रोकने की मांग भी की।

इस बीच कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भाजपा पर हमला बोला। 'मणिपुर फिर खून से लथपथ है,' कहते हुए उन्होंने मई 2023 से 300 से ज्यादा मौतों और 24,530 लोगों के राहत शिविरों में रहने का जिक्र किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से तीन सवाल पूछे।

ताजा तनाव की वजह 19 अक्टूबर को खोंगबन सुनुरोक में अरुबाम रोनिल, लैरेंलक्पम इनाओबी और क्षेत्रीयम सुशील की हत्या है। इन हत्याओं के विरोध में बनी संयुक्त कार्रवाई समिति ने गुरुवार को राज्यव्यापी धरना बुलाया है और स्कूल-कॉलेजों से कामकाज ठप कर आंदोलन में शामिल होने की अपील की है। सोमवार को मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह के आवास के बाहर विरोध कर रहे मृतकों के परिजनों को पुलिस ने आंसू गैस से खदेड़ा था।