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हिंसा पर कांग्रेस का हमला: मुख्यमंत्री का इस्तीफा और विधानसभा भंग कर नए चुनाव की मांग

कांग्रेस ने रविवार को मणिपुर के मुख्यमंत्री वाई. खेमचंद सिंह के इस्तीफे, विधानसभा भंग करने और नए चुनाव की मांग की। पार्टी ने राज्य में बढ़ती हिंसा को रोकने में नाकामी का आरोप लगाया। सांसद सप्तगिरि उलाका ने कहा कि मई 2023 से करीब 300 लोग मारे गए और लगभग 60,000 विस्थापित हुए।

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नई दिल्ली: कांग्रेस ने रविवार को मांग की कि मणिपुर के मुख्यमंत्री वाई. खेमचंद सिंह इस्तीफा दें, विधानसभा भंग की जाए और नए चुनाव कराए जाएं। पार्टी का आरोप है कि राज्य की BJP सरकार हिंसा रोकने में पूरी तरह नाकाम रही है।

दिल्ली में पत्रकार परिषद में कांग्रेस सांसद और मणिपुर प्रभारी सप्तगिरि उलाका ने कहा कि आम लोगों पर हमला करने वाले किसी सशस्त्र समूह या व्यक्ति को "राजनीतिक संरक्षण या छूट" नहीं मिलनी चाहिए। उन्होंने हत्याओं, फायरिंग, आगजनी और नागरिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामलों में समयबद्ध जांच और मुकदमे की मांग की।

उलाका ने 19 अक्टूबर को लकड़ी इकट्ठा करने गए तीन मैतेई नागरिकों की हत्या और कामजोंग जिले की उस झड़प का जिक्र किया, जिसमें कुकी और नागा नागरिक मारे गए थे। शुक्रवार 23 अक्टूबर के विरोध प्रदर्शनों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि पांच जिलों में हजारों लोग लोक भवन की ओर मार्च कर रहे थे, जब पुलिस ने उन्हें रोका। उनका आरोप है कि प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस के गोले और लाठीचार्ज किया गया।

आंकड़ों पर कांग्रेस नेता ने कहा कि मई 2023 से करीब 300 लोग मारे गए, लगभग 60,000 विस्थापित हुए और करीब 24,000 अब तक घर नहीं लौट पाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सशस्त्र समूहों के पास सुरक्षा बलों से ज्यादा आधुनिक हथियार हैं।

इस महीने की शुरुआत में राज्य का दौरा करने वाली महिला कांग्रेस अध्यक्ष अलका लांबा ने कहा कि संघर्ष से प्रभावित महिलाएं आज भी मुश्किलें झेल रही हैं। "मणिपुर की BJP सरकार वहां हिंसा रोकने में पूरी तरह नाकाम रही है," उन्होंने कहा।

पार्टी की मांगों में संवेदनशील इलाकों में नागरिकों की तत्काल सुरक्षा, सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस के ग्राउंड रूल का सख्ती से पालन, राज्यभर में आवागमन बहाल करना और विस्थापितों की वापसी व पुनर्वास के लिए भरोसेमंद रोडमैप शामिल है। पार्टी चाहती है कि केंद्र सरकार दखल दे और समावेशी शांति प्रक्रिया शुरू करे।

शनिवार को मुख्यमंत्री ने राज्य की सभी 36 जनजातियों का प्रतिनिधित्व करने वाली एक समिति बनाने की योजना का ऐलान किया था। उन्होंने कहा था कि यह सुझाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस सवाल के बाद आया कि क्या ऐसी कोई संस्था है जो सबको जोड़ सके। मैतेई और कुकी समुदायों के बीच जातीय संघर्ष मई 2023 में शुरू हुआ था और हाल के महीनों में कुकी तथा नागा समूहों के बीच भी झड़पें दर्ज हुई हैं।