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महाराष्ट्र बना 'भारत पूर्वानुमान प्रणाली' अपनाने वाला पहला राज्य: गिरीश महाजन

महाराष्ट्र देश का पहला राज्य बन गया है, जिसने अत्याधुनिक मौसम पूर्वानुमान प्रणाली अपनाई है। इससे मौसम की चेतावनी, स्थानीय स्तर पर तैयारी और समन्वित प्रतिक्रिया में बड़े सुधार की उम्मीद है।

लेखक: Team DGIPR· · 2 मिनट में पढ़ें
गिरीश महाजन, आपदा प्रबंधन मंत्री, मौसम पूर्वानुमान प्रणाली समझौता
फ़ोटो: Team DGIPR

मुंबई, 21 मई: महाराष्ट्र 'भारत पूर्वानुमान प्रणाली' (Bharat Forecast System) अपनाने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। इससे मौसम संबंधी सलाह, स्थानीय स्तर की तैयारी और समन्वित प्रतिक्रिया व्यवस्था में बड़े सुधार की उम्मीद है। आपदा प्रबंधन मंत्री गिरीश महाजन ने कहा कि इस उद्देश्य से भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM) के साथ हुआ समझौता राज्य की आपदा प्रबंधन क्षमता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

महाराष्ट्र राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) ने पुणे स्थित भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM) के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस सहयोग से आपदा से पहले की तैयारी और भारी बारिश जैसी मौसम से जुड़ी आपदाओं का सामना करने की राज्य की क्षमता काफी बढ़ेगी।

इस समझौते के तहत भारत सरकार के भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 'मिशन मौसम' के तहत विकसित स्वदेशी 'भारत पूर्वानुमान प्रणाली' (BharatFS) को अब सीधे राज्य की निर्णय प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा। यह प्रणाली राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र (SEOC) और जियो-स्पेशियल डिसीजन सपोर्ट सिस्टम (GeoDSS) के जरिए काम करेगी।

इस पहल के साथ महाराष्ट्र देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है, जिसने एडवांस्ड डेटा एनालिटिक्स और परिचालन प्रक्रियाओं के जरिए अपनी आपदा प्रबंधन और चेतावनी प्रणाली को काफी मजबूत किया है। BharatFS प्रणाली 6 किमी × 6 किमी के खास ग्रिड के लिए बेहद बारीक और उच्च गुणवत्ता वाले मौसम पूर्वानुमान तैयार कर सकती है। इसलिए अब मौसम की सटीक जानकारी ग्राम पंचायत और उप-तालुका स्तर तक पहुंचेगी। पहले 12 किमी × 12 किमी के रिज़ॉल्यूशन वाले पूर्वानुमान उपलब्ध थे, इस लिहाज से यह बड़ा सुधार है।

यह प्रणाली लू, भारी बारिश, तूफान, बाढ़ और भूस्खलन जैसी आपदाओं से निपटने की तैयारी को तेज और अधिक प्रभावी बनाएगी। मौसम से जुड़ी जानकारी हर तीन घंटे में अपडेट होगी, जिसमें वर्षा, अधिकतम और न्यूनतम तापमान, वायुमंडलीय दबाव, हवा की गति और दिशा तथा बादल छाने जैसी जानकारी लगभग वास्तविक समय में मिलेगी।

नागरिकों को हर तीन घंटे पर उच्च-रिज़ॉल्यूशन मौसम पूर्वानुमान, इम्पैक्ट-आधारित पूर्वानुमान (IBF) और स्वचालित अलर्ट सिस्टम मिलेगा। साथ ही, सायरन, मोबाइल संदेशों और सार्वजनिक प्रसारण प्रणालियों के जरिए एक साथ सूचनाएं भेजने की सुविधा भी होगी। इससे दूर-दराज के लोगों तक भी समय पर चेतावनी पहुंचाने की क्षमता काफी बढ़ेगी।

आपदा प्रबंधन, राहत और पुनर्वास विभाग की प्रधान सचिव विनीता सिंघल ने कहा, "इस सहयोग से राज्य और जिला स्तर पर निर्णय प्रक्रिया तेज और अधिक डेटा-आधारित होगी। इससे चेतावनी प्रणाली अधिक प्रभावी होगी और सूचनाएं आखिरी व्यक्ति तक सहजता से पहुंचेंगी।"

SDMA के निदेशक डॉ. भालचंद्र चव्हाण ने कहा, "इस सहयोग से वैज्ञानिक मौसम डेटा सीधे जिला प्रशासन और स्थानीय एजेंसियों के हाथों में पहुंचेगा। पूरे राज्य में नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में यह एक बड़ा और प्रभावी कदम है।"

नागरिकों से अपील है कि वे SDMA के आधिकारिक माध्यमों से नियमित रूप से मौसम पूर्वानुमान, आपदा तैयारी की जानकारी और आपातकालीन सूचनाएं प्राप्त करते रहें। आपात प्रतिक्रिया और राहत के हेल्पलाइन नंबर इस प्रकार हैं: SDMA 1070, DDMA 1077 और एम्बुलेंस/मेडिकल इमरजेंसी सेवा 108।