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उत्कृष्ट गणेशोत्सव मंडल प्रतियोगिता 2026: हांगकांग, उत्तराखंड और सांगली के मंडल अव्वल

महाराष्ट्र राज्य उत्कृष्ट सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडल प्रतियोगिता 2026 के नतीजे घोषित हो गए हैं। 354 मंडलों ने हिस्सा लिया, और मूर्तिकार राजन पाटकर को पहला वेलिंग-खातू गणेश मूर्तिकार पुरस्कार मिला है।

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मूर्तिकार राजन विष्णु पाटकर, पहले वेलिंग-खातू गणेश मूर्तिकार पुरस्कार के विजेता

बाप्पा के चरणों में अर्पित भक्ति, निस्वार्थ सेवा और महाराष्ट्र की संस्कृति का उत्सव सिर्फ राज्य तक सीमित नहीं रहा, बल्कि समंदर पार भी गूंज उठा है। 'महागणेशोत्सव: महाराष्ट्र का राज्य उत्सव' के तहत आयोजित 'महाराष्ट्र राज्य उत्कृष्ट सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडल प्रतियोगिता 2026' के नतीजे घोषित हो गए हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हांगकांग, राष्ट्रीय स्तर पर उत्तराखंड और राज्य स्तर पर सांगली के गणेशोत्सव मंडल ने बाजी मारकर पहला स्थान हासिल किया है। बाप्पा की सेवा में दिन-रात जुटे कुल 354 गणेशोत्सव मंडलों ने इस प्रतियोगिता में हिस्सा लेकर उत्सव का उत्साह दोगुना कर दिया।

इस बार की प्रतियोगिता में सिर्फ मंडल ही नहीं, बल्कि उन मूर्तिकारों का भी सम्मान हुआ, जिनके हाथों के स्पर्श से मिट्टी को देवत्व मिलता है। सरकार ने इस साल पहली बार शुरू किया गया प्रतिष्ठित 'वेलिंग-खातू गणेश मूर्तिकार पुरस्कार' पारंपरिक मूर्तिकला की विरासत संभालने वाले वरिष्ठ मूर्तिकार राजन विष्णु पाटकर को दिया है।

विश्व, राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर किसने मारी बाजी? विदेश में रहकर भी मराठी मिट्टी और परंपरा से गहरा जुड़ाव रखने वाले मंडल इस प्रतियोगिता का मुख्य आकर्षण रहे।

अंतरराष्ट्रीय स्तर (समंदर पार बाप्पा की धूम):

पहला स्थान: महाराष्ट्र मंडल, हांगकांग दूसरा स्थान: एडोगावा इंडिया कल्चर सेंटर, जापान तीसरा स्थान: हेसन इंडियन लेडीज एसोसिएशन और पायोनियर इंडियन्स ई.व्ही.

राष्ट्रीय स्तर (देशभर में उत्सव की गूंज):

पहला स्थान: महाराष्ट्र समाज सेवा समिति, उत्तराखंड दूसरा स्थान: श्री राम युवक मंडल, कर्नाटक तीसरा स्थान: गणराया गणेश उत्सव, गुजरात

राज्य स्तर (महाराष्ट्र की शान):

पहला स्थान: मोरया गणेश मंडल, सांगली दूसरा स्थान: छत्रपती सार्वजनिक गणेश मंडल (दीपकनगर), नांदेड तीसरा स्थान: स्वराज्य गणेश मंडल, देवनांद्रा

इन तीनों स्तरों के विजेताओं को क्रमशः 7.5 लाख रुपये (पहला), 5 लाख रुपये (दूसरा) और 2.5 लाख रुपये (तीसरा) की नकद राशि और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया जाएगा। इस प्रतियोगिता का उत्साह सिर्फ महानगरों तक सीमित नहीं रखा गया। यह जिला और तालुका स्तर तक पहुंचाया गया है, और वहां के विजेताओं की भी अलग से घोषणा हुई है।

मिट्टी को देवत्व देने वाले मूर्तिकार राजन पाटकर का सम्मान पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही मूर्तिकला की विरासत और मूर्तियों में प्राण फूंकने वाले हाथ... इस निस्वार्थ साधना को आखिरकार राज्य सरकार का गर्व भरा सम्मान मिला है। इस साल पहली बार शुरू किए गए 'वेलिंग-खातू गणेश मूर्तिकार पुरस्कार' के पहले विजेता राजन विष्णु पाटकर बने हैं। इस पुरस्कार में शाल, स्मृति चिह्न और 2.5 लाख रुपये की नकद राशि दी जाती है।

मुंबई के गणेशोत्सव के इतिहास में राजन पाटकर का नाम बड़े सम्मान से लिया जाता है। मुंबई की शान 'गिरगांव का राजा' की मनमोहक मूर्ति के पीछे उन्हीं की कला-साधना है। इतना ही नहीं, वडाला के मशहूर जी.एस.बी. सेवा मंडल की विशाल और सुंदर गणेश मूर्ति के वे मुख्य मूर्तिकार हैं, और पिछले 35 वर्षों से अधिक समय से श्रद्धा के साथ यह सेवा कर रहे हैं।

उनकी कला की खासियत यह है कि उन्होंने परंपरा के साथ-साथ प्रकृति की रक्षा का संदेश भी दिया है। पर्यावरण-अनुकूल उत्सव को बढ़ावा देने के लिए बनाई गई उनकी हल्की, पानी में आसानी से घुल जाने वाली 'पेपर मैशी' गणेश मूर्तियों को मुंबई से लेकर लंदन तक पसंद किया जा रहा है।

संस्कृति और भक्ति का अनोखा संगम इस भव्य उत्सव पर खुशी जताते हुए सांस्कृतिक कार्य मंत्री एड. आशीष शेलार ने विजेताओं और सभी भाग लेने वाले मंडलों की सराहना की।