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महाराष्ट्र-दक्षिण कोरिया साझेदारी से कौशल विकास को नई रफ्तार: मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस

महाराष्ट्र के युवाओं को कोरियाई विशेषज्ञता और उन्नत तकनीक का सीधा लाभ मिलेगा। तीन समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर हुए हैं, जिनसे बुनियादी औद्योगिक कौशल से लेकर उच्च स्तरीय प्रशिक्षण तक सहयोग मिलेगा।

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महाराष्ट्र और दक्षिण कोरिया के बीच कौशल विकास समझौते, सह्याद्री अतिथिगृह

मुंबई, 21 मई: नए दौर के उद्योग, कारोबार और कौशल विकास में दक्षिण कोरिया ने दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई है। महाराष्ट्र और दक्षिण कोरिया के बीच हुए सहयोग समझौतों से कोरिया की उत्कृष्ट विशेषज्ञता और उन्नत तकनीक भारत आएगी, जिसका सीधा फायदा भारतीय छात्रों को होगा। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि इन समझौता ज्ञापनों (MoU) के जरिए बुनियादी औद्योगिक कौशल से लेकर उच्च स्तरीय दक्षताओं तक, हर स्तर के प्रशिक्षण को सहयोग मिलेगा।

सह्याद्री अतिथिगृह में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की उपस्थिति में कुल तीन समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर हुए। पहला समझौता कौशल, रोजगार, उद्यमिता और नवाचार विभाग के व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण निदेशालय तथा कोरिया पॉलिटेक्निक्स (दक्षिण कोरिया) के बीच हुआ। दूसरा महाराष्ट्र राज्य कौशल विकास सोसायटी और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रीय आजीवन शिक्षा संस्थान (NILE) के बीच हुआ। तीसरा रतन टाटा महाराष्ट्र राज्य कौशल विश्वविद्यालय और दक्षिण कोरिया के एक प्रतिष्ठित संस्थान की दो शाखाओं के बीच हुआ।

इस अवसर पर कौशल, रोजगार, उद्यमिता और नवाचार मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा, इसी विभाग की अपर मुख्य सचिव मनीषा वर्मा, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव लोकेश चंद्र, व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण निदेशालय के निदेशक डॉ. सतीश सूर्यवंशी, रतन टाटा महाराष्ट्र राज्य कौशल विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. अपूर्व पालकर, भारत सरकार के प्रशिक्षण महानिदेशक दिलीप कुमार, राष्ट्रीय कौशल संस्थान के क्षेत्रीय निदेशक सी.एस. मूर्ति, महाराष्ट्र राज्य नवाचार समाज के आयुक्त डॉ. अमित सैनी और मुंबई शहर की जिलाधिकारी अंचल गोयल मौजूद थे। कोरिया गणराज्य के प्रतिनिधिमंडल में कोरिया एडवांस्ड इंस्टिट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (KAIST) के डॉ. सेउंग हुन हान और कोरिया पॉलिटेक्निक्स के डॉ. [Name] शामिल थे। कार्यक्रम में क्रेविट एंड कीज़ और नेक्सन टेक्नोलॉजी जैसी संस्थाओं के वरिष्ठ प्रतिनिधि भी आए, साथ ही NILE से यंग-आह कांग और सुश्री मिन-सियोन पार्क भी मौजूद रहीं।

मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि कौशल विकास विभाग ने देश के जनसांख्यिकीय लाभ, खासकर युवाओं की नवाचार क्षमता, को देश के विकास में लगाने की दिशा में एक अहम कदम उठाया है। भारत को भौगोलिक और जनसांख्यिकीय, दोनों तरह का बड़ा फायदा मिला है। देश की लगभग 65 प्रतिशत आबादी 35 साल से कम उम्र की है, और यही आबादी हमारी असली ताकत है। हमारा मुख्य लक्ष्य इस उम्र वर्ग के नवाचार के जज्बे को मूल्यवान 'मानव संसाधन' में बदलना है।

फडणवीस ने आगे कहा कि महाराष्ट्र देश का ग्रोथ इंजन है। राज्य की अर्थव्यवस्था अभी 660 अरब डॉलर की है और इसे निकट भविष्य में 1 ट्रिलियन डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य है। इसके लिए उद्योग जगत को हर स्तर पर कुशल प्रतिभा चाहिए। इस संदर्भ में यह अंतरराष्ट्रीय कौशल समझौता राज्य की आर्थिक प्रगति को बड़ा बल देगा। यह समझौता सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रहेगा, जल्द ही इस पर ठोस काम शुरू होगा। यह ऐतिहासिक सहयोग उद्योग को कुशल कार्यबल देगा और साथ ही भारतीय युवाओं के लिए वैश्विक रोजगार के नए रास्ते भी खोलेगा।

**महाराष्ट्र में कौशल विकास का नया दौर: मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा**

ये समझौते महाराष्ट्र के युवाओं को विश्वस्तरीय कौशल, आधुनिक तकनीक के प्रशिक्षण और अंतरराष्ट्रीय मंच पर रोजगार के अवसर दिलाने की दिशा में बेहद अहम हैं। दक्षिण कोरिया की अग्रणी संस्थाओं के साथ यह साझेदारी राज्य के कौशल विकास तंत्र में नई ऊर्जा भरेगी। महाराष्ट्र सरकार ऐसा कार्यबल तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध है जो प्रशिक्षित हो, तकनीक में निपुण हो और नवाचार की सोच रखता हो, ताकि वह उद्योग की बदलती जरूरतों के अनुरूप हो। कौशल, रोजगार, उद्यमिता और नवाचार मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने कहा कि इस सहयोग से राज्य का यह विभाग देश में अग्रणी स्थान हासिल करेगा।

**दक्षिण कोरिया के सहयोग से 'DAKSH' परियोजना पर दो दिवसीय कार्यशाला: अपर मुख्य सचिव मनीषा वर्मा**

अपर मुख्य सचिव मनीषा वर्मा ने कहा कि 'DAKSH' पहल और 'कोरिया-वर्ल्ड बैंक पार्टनरशिप फैसिलिटी' (KWPF) के तहत मिले विश्व बैंक के सहयोग से महाराष्ट्र के कौशल विकास तंत्र को वैश्विक मानकों तक ले जाना बेहद अहम है। इस अनुदान से तकनीकी शिक्षा और व्यावसायिक प्रशिक्षण (TVET) क्षेत्र में दीर्घकालिक सुधारों के लिए परियोजनाएं चल रही हैं। इनमें कौशल अंतर का आकलन, आईटीआई छात्रों पर ट्रेसर स्टडी और मॉडल आईटीआई की अवधारणा शामिल हैं। मुंबई में 21-22 मई 2026 को हो रही इस कार्यशाला में भारत सरकार, महाराष्ट्र सरकार और दक्षिण कोरिया की प्रमुख कौशल संस्थाओं के विशेषज्ञ एक मंच पर जुटे हैं। "मुझे भरोसा है कि 'कोरिया पॉलिटेक्निक्स' और 'KRIVET' जैसी कोरियाई संस्थाओं के संयुक्त अनुभव और भारतीय उद्योग के दिग्गजों के मार्गदर्शन से हमारी संस्थागत क्षमता और मजबूत होगी। TVET तंत्र का सशक्तीकरण 'विकसित भारत 2047' और 'विकसित महाराष्ट्र 2047' के लक्ष्यों की नींव बनेगा।" 'लर्निंग फैक्ट्री' मॉडल: DVET-KOPO साझेदारी से महाराष्ट्र में बनेंगे प्रशिक्षण केंद्र

राज्य सरकार के व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण निदेशालय (DVET) और दक्षिण कोरिया की कोरिया पॉलिटेक्निक्स के बीच हुए समझौते को राज्य की तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। इसके तहत दक्षिण कोरिया की मशहूर 'लर्निंग फैक्ट्री' अवधारणा पर आधारित उन्नत प्रशिक्षण केंद्र पूरे महाराष्ट्र में खोले जाएंगे। ये केंद्र अत्याधुनिक तकनीक और व्यावहारिक प्रशिक्षण से चलेंगे और विभिन्न उद्योगों की जरूरतों के हिसाब से तैयार होंगे। इस परियोजना में KOPO मुख्य साझेदार होगा। जरूरत पड़ने पर KT, KITECH और KATEC जैसी दूसरी कोरियाई तकनीकी संस्थाओं की विशेषज्ञता भी ली जाएगी। इन केंद्रों के लिए रणनीतिक मैनुअल मई से सितंबर 2026 के बीच तैयार होना है, और इनका लक्ष्य मार्च 2027 से जून 2028 के बीच इन्हें पूरी क्षमता से चालू करना है। यहां छात्रों को आधुनिक मशीनों, उद्योग-केंद्रित पाठ्यक्रम और प्रशिक्षित प्रशिक्षकों की टीम के साथ नए कौशल सिखाए जाएंगे।

**MSSDS-NILE समझौते से महाराष्ट्र में 'आजीवन शिक्षा' को बढ़ावा**

महाराष्ट्र राज्य कौशल विकास सोसायटी (MSSDS) और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रीय आजीवन शिक्षा संस्थान (NILE) के बीच हुए समझौते से राज्य की सतत शिक्षा और कौशल संवर्धन की कोशिशों को नई दिशा मिलेगी। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य महाराष्ट्र के लिए 'आजीवन शिक्षा' पर एक व्यापक नीतिगत ढांचा तैयार करना है, यानी जीवन भर शिक्षा और कौशल विकास को जारी रखना। बदलती तकनीक और रोजगार की मांग के बीच युवाओं और कार्यबल को लगातार नए कौशल मिलते रहें, इसके लिए एक मजबूत डिजिटल शिक्षा और प्रमाणन प्रणाली विकसित की जाएगी।

इस पहल के तहत राज्य के लिए 'आजीवन शिक्षा नीति ढांचा' और उसकी संचालन पुस्तिका तैयार की जाएगी। उद्योग और शिक्षा क्षेत्र के बीच की दूरी घटाने के लिए अपस्किलिंग और रीस्किलिंग के डिजिटल मंच बनाए जाएंगे। इन कार्यक्रमों का वास्तविक क्रियान्वयन जनवरी 2027 से जून 2028 के बीच होना तय है।

**रतन टाटा महाराष्ट्र राज्य कौशल विश्वविद्यालय और KAIST की साझेदारी से शोध और उच्च शिक्षा में वैश्विक अवसर**

रतन टाटा महाराष्ट्र राज्य कौशल विश्वविद्यालय और दक्षिण कोरिया के प्रतिष्ठित KAIST संस्थान की दो शाखाओं के बीच हुए समझौते को राज्य की उच्च शिक्षा और शोध के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। यह साझेदारी KAIST के ग्रेजुएट स्कूल ऑफ ग्रीन ग्रोथ एंड सस्टेनेबिलिटी (KAIST-GGGS) और ग्रेजुएट स्कूल ऑफ ग्लोबल डिजिटल इनोवेशन (KAIST-GDI) के साथ हुई है। इसके केंद्र में सतत विकास और डिजिटल नवाचार हैं। समझौते के तहत विश्वविद्यालय के चुनिंदा शिक्षक, कर्मचारी और पूर्व छात्र KAIST में मास्टर्स और पीएचडी की पढ़ाई कर सकेंगे। पढ़ाई पूरी करके ये विशेषज्ञ महाराष्ट्र लौटेंगे और विश्वविद्यालय की शैक्षणिक और शोध क्षमता मजबूत करेंगे। दोनों संस्थान मिलकर 'Joint Research Center on Global Sustainability' नाम का संयुक्त शोध केंद्र स्थापित करेंगे। इस दीर्घकालिक साझेदारी की योजना बनाने और उसे लागू करने के लिए एक 'संयुक्त संचालन समिति' (Joint Steering Committee) भी गठित होगी।