मुंबई: आठ महीनों में डेढ़ हजार आत्महत्याएं. यानी रोज छह से ज्यादा. लोकसभा चुनाव के दौरान के इस आंकड़े को दशहरा रैली की कवरेज में दर्ज किया गया है.
राज्य में किसानों की आत्महत्याओं का यह आंकड़ा मंगलवार (20 अक्टूबर) को हुई दशहरा रैली के सिलसिले में सामने आया. आठ महीनों में डेढ़ हजार किसान परिवारों ने अपनी जान खत्म कर ली.
रैली के मंच से किसानों के हालात पर तीखी आलोचना हुई. सूखे ने फसलें झुलसा दी हैं और ओलावृष्टि की मदद अब तक किसानों तक नहीं पहुंची, ऐसी बात कही गई.
आंकड़ा सामने रखने के बाद यह सवाल भी उठाया गया कि आत्महत्याओं का दोष किसे दिया जाए. इसका जवाब कवरेज में नहीं है.
उसी कवरेज में इन आत्महत्याओं के मुकाबले सरकार की मदद का जिक्र भी है. सूखे से परेशान किसानों के लिए दिवाली पर राज्य सरकार ने 5 हजार रुपये की अग्रिम मदद का ऐलान किया है. डेढ़ हजार मौतें और पांच हजार रुपये, दोनों आंकड़े एक ही खबर में साथ आए.
परभनी दौरे के लिए बेटे को पैसे नहीं दे पाने के कारण एक किसान के बेटे ने आत्महत्या की, ऐसा उद्धव ठाकरे ने इसी रैली में कहा. यह उनका दावा है.
राज्य के किसान परिवारों पर कर्ज, फसल बीमा और मदद की प्रक्रिया को लेकर सवाल बने हुए हैं. चुनाव के दौरान के आठ महीनों का यह आंकड़ा मदद किस तक पहुंची, इसका हिसाब मांगता है.
डेढ़ हजार परिवारों के ये आठ महीने कैसे बीते, यह कवरेज में नहीं खुला. आंकड़ा सामने आया, पर आगे इस पर क्या कदम उठेंगे, इसका जवाब अब तक नहीं.