मुंबई : शिवसेना की 60वीं दशहरा रैली मंगलवार को मुंबई में दो मंचों पर बंट गई, और दोनों तरफ एक ही शब्द गूंजा — वोट चोरी। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने गोरेगांव के नेस्को सेंटर में अपने धड़े की रैली को संबोधित किया; पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने दादर के शिवाजी पार्क में भाषण दिया, जहां 1966 में बालासाहेब ठाकरे ने पार्टी की पहली रैली की थी।
शिंदे ने कहा कि असली "वोट चोरी" 2019 के विधानसभा चुनाव के बाद हुई, जब अविभाजित शिवसेना ने एनसीपी और कांग्रेस के साथ महाविकास आघाड़ी सरकार बनाई। ठाकरे का नाम लिए बिना उन्होंने कहा, "आप बैकडोर से आकर मुख्यमंत्री बने। आपने जनादेश को तोड़ा।" उन्होंने इंडिया गठबंधन को "दस मुखों वाला रावण" कहा और उसका पुतला जलाने की बात कही। राहुल गांधी की सुप्रीम कोर्ट तक रैली को उन्होंने न्यायपालिका का अपमान बताया।
किसानों की ओर मुड़कर शिंदे ने कहा कि उन्होंने सूखे से पीड़ित किसानों को दिवाली से पहले तोहफे के तौर पर पहला 100 टन अनाज भेजा है, और 32,000 करोड़ रुपये का कर्जमाफी ढांचा बनाया है।
ठाकरे ने "सत्ता बदलने" की बात कही और केंद्र की भाजपा सरकार हटने पर "अच्छे दिन" का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि सड़कों पर उतरे युवा "नक्सली नहीं, क्रांतिकारी" हैं, और दावा किया कि देशभर में 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए। टाइगर श्रॉफ पर हमले को लेकर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर तंज कसा, लॉरेंस बिश्नोई को चुनौती दी और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की टिप्पणी की आलोचना की।
दोनों नेताओं ने बालासाहेब ठाकरे की जन्मशताब्दी याद की। "भगवा ध्वज सिर्फ महाराष्ट्र विधानसभा पर ही नहीं, लाल किले पर भी फहराना है," ठाकरे ने कहा।
दोनों रैलियों के पीछे का गणित भी अहम है। उद्धव ठाकरे ने युवा आंदोलन को समर्थन देते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर भी निशाना साधा — "रामायण में विभीषण ने बताया था कि रावण का प्राण उसकी नाभि में है, वैसे ही इनका प्राण ज्ञानेश कुमार में है।" वहीं शिंदे ने कांग्रेस के दशकों के शासन पर 'लूट' का आरोप लगाया। दोनों तरफ के कार्यकर्ताओं ने कानून-व्यवस्था, बेरोजगारी और महंगाई पर चिंता जताई।