राज्य में सूखे जैसे हालात के बीच राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने निर्देश दिया है कि बकाया बिजली बिल या ट्रांसफॉर्मर न होने के कारण बंद पड़ी सभी ग्रामीण और शहरी जलापूर्ति योजनाएं तुरंत चालू की जाएं। उन्होंने यह भी साफ किया कि पानी की कमी वाले गांवों में टैंकर केवल आखिरी विकल्प के तौर पर इस्तेमाल हों। उससे पहले कुएं अधिग्रहित करने और स्थानीय जल स्रोतों को मजबूत करने जैसे सभी उपाय अपनाए जाएं।
सह्याद्री अतिथि गृह में सूखे से जुड़ी मंत्रिमंडलीय उप-समिति की अहम बैठक में उन्होंने यह बात कही। बैठक में जिलाधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे अपने जिलों की सूखा राहत योजनाओं के विस्तृत प्रस्ताव अगले 15 दिनों में भेजें, ताकि उन्हें मंजूरी के लिए मुख्यमंत्री के पास भेजा जा सके।
बिजली बिलों के लिए 15वें वित्त आयोग के पैसों का उपयोग केवल बकाया बिजली बिलों के कारण जलापूर्ति योजनाएं बंद न रहें, इसके लिए मंत्रियों ने ये ठोस वित्तीय रास्ते सुझाए:
धन का उपयोग: बकाया बिजली बिल चुकाने के लिए संबंधित जिले 15वें वित्त आयोग से मिले धन का पहले इस्तेमाल करें।
एकमुश्त समझौता (OTS): अन्य जिलों में एकमुश्त समझौता योजना के जरिए लंबित बिलों का निपटारा किया जाए।
ट्रांसफॉर्मर की उपलब्धता: जहां ट्रांसफॉर्मर जल जाने या उपलब्ध न होने से योजनाएं अटकी हैं, वहां महावितरण और ऊर्जा विभाग तुरंत ट्रांसफॉर्मर लगाकर बिजली आपूर्ति बहाल करें।
पानी की कमी से निपटने के अल्पकालिक और दीर्घकालिक कदम स्थिति और बिगड़ने से पहले बचाव के उपायों पर जोर देने के आदेश दिए गए हैं:
कुआं अधिग्रहण और मरम्मत: जिन निजी कुओं में अब भी पानी है, उन्हें तुरंत अधिग्रहित किया जाए। खराब हैंडपंपों की मरम्मत युद्धस्तर पर हो।
अधूरी योजनाओं में तेजी: 75 से 80 प्रतिशत काम पूरा हो चुकी जलापूर्ति योजनाओं को बाकी धन देकर जल्द चालू किया जाए।
टैंकर के लिए जीपीएस और ऐप: मजबूरी में टैंकर चलाने पड़ें तो पानी वितरण में पारदर्शिता के लिए टैंकर ऐप और जीपीएस ट्रैकिंग प्रणाली अनिवार्य होगी।
सीएसआर फंड का उपयोग: मुख्य सचिव को निर्देश दिया गया है कि वे विभिन्न कंपनियों के सामाजिक दायित्व (सीएसआर) फंड से सूखाग्रस्त इलाकों में जल संरक्षण के काम कराने के लिए संबंधित पक्षों की बैठक लें।
चारा शिविरों की जगह स्थानीय चारा उत्पादन पर जोर उप-समिति को उम्मीद है कि मौजूदा हालात में दिसंबर तक पशुओं के लिए चारा शिविर शुरू करने की नौबत नहीं आएगी। फिर भी संभावित कमी को देखते हुए तैयारी के निर्देश दिए गए हैं:
कम समय वाली फसलें: कम समय में और कम पानी में तैयार होने वाली चारा फसलों की बुवाई के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जाए और चारा फसलों के न्यूनतम दाम तय हों।
जिलाधिकारी समिति और एसओपी: चारा उत्पादन की जिम्मेदारी जिलाधिकारी की अध्यक्षता वाली समिति के पास होगी। कृषि विभाग कार्यकारी भूमिका में होगा, जबकि पशुसंवर्धन विभाग निगरानी का काम करेगा। ग्रामीण विकास विभाग के समन्वय से चारा बुवाई से लेकर वितरण तक की अलग कार्यप्रणाली (एसओपी) एक हफ्ते में तय की जाएगी।
जिलों के बीच आपूर्ति: कोंकण के सिंधुदुर्ग, रत्नागिरी और रायगड़ जिलों में धान के पुआल की भरपूर मात्रा है। इन जिलों से पड़ोस के सूखाग्रस्त जिलों में चारा भेजने की योजना बनाई जाए।
गाद वाली जमीन का उपयोग: वन विभाग, बांधों और तालाबों के किनारे की गाद वाली जमीन पर चारे की खेती की जाए। इस काम के लिए महिला स्वयं सहायता समूहों को प्राथमिकता दी जाए।
केंद्र को अक्टूबर के अंत तक अंतिम सूखा प्रस्ताव राहत एवं पुनर्वास विभाग की अपर मुख्य सचिव विनिता वेद सिंघल ने बैठक में बताया कि कृषि विभाग राज्य की 305 तालुकों में “ट्रिगर-1” और “ट्रिगर-2” के मानकों पर सर्वेक्षण और पंचनामे कर रहा है, जो जल्द पूरे होंगे। इस वस्तुनिष्ठ रिपोर्ट के आधार पर अक्टूबर के अंत तक केंद्र सरकार को सूखा राहत के लिए अंतिम प्रस्ताव भेजा जाएगा।
मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि सूखा राहत, मरम्मत और पानी की योजनाओं के लिए जिला नियोजन समिति (DPDC) के जरिए धन जारी करने के आदेश जारी होंगे।
मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित बैठक में मंत्रिमंडलीय उप-समिति के सदस्य और वरिष्ठ अधिकारी बड़ी संख्या में मौजूद थे:
मंत्रिमंडल सदस्य: आपदा प्रबंधन मंत्री गिरीश महाजन, कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणे, राहत एवं पुनर्वास मंत्री मकरंद जाधव पाटील, पशुसंवर्धन मंत्री पंकजा मुंडे, जलापूर्ति मंत्री गुलाबराव पाटील, मृदा एवं जलसंधारण मंत्री संजय राठोड, सहकार मंत्री बाबासाहेब पाटील, मत्स्य व्यवसाय और बंदरगाह मंत्री नीतेश राणे, ग्रामीण विकास मंत्री जयकुमार गोरे और राज्य मंत्री एडवोकेट आशीष जयस्वाल।
प्रशासनिक प्रमुख: मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल; अपर मुख्य सचिव आभा शुक्ला (ऊर्जा), मनीषा म्हैसकर (गृह), विकास खारगे (राजस्व), विकासचंद्र रस्तोगी (वित्त) और पराग जैन-नैनुटिया (जलापूर्ति); प्रधान सचिव एकनाथ डवले (जल संपदा) और प्रवीण दराडे (सहकार); कृषि सचिव परिमल सिंह, पशुसंवर्धन सचिव एन. रामास्वामी, ग्रामीण विकास सचिव डॉ. चंद्रकांत पुलकुंडवार और मृदा एवं जलसंधारण सचिव जितेंद्र पापलकर।

