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"मेरे महाराष्ट्र की आंखों से सूखे के आंसू पोंछने ही हैं!": मुख्यमंत्री फडणवीस का संकल्प

फडणवीस ने प्रशासन से सूखे का अभिशाप खत्म करने के लिए एक परिवार की तरह मिलकर काम करने की अपील की है। 'वॉटर कप' अभियान जल्दी शुरू हो रहा है, और बारिश की हर बूंद रोकने पर जोर है।

लेखक: mukhymantri.com· · 2 मिनट में पढ़ें
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, सूखामुक्त महाराष्ट्र और जलसंधारण की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में

सूखी पड़ती जमीनें, साल दर साल पानी के लिए मीलों भटकती महिलाएं और आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठा किसान... महाराष्ट्र की किस्मत में लिखे इस सूखे के अभिशाप को हमेशा के लिए मिटाने के लिए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने एक बार फिर कमर कस ली है। "सूखे के खिलाफ यह लड़ाई सिर्फ योजनाओं की नहीं, लाखों किसानों की जिंदगी की है। इसलिए बारिश की हर बूंद रोकने के लिए पूरा प्रशासन एक परिवार की तरह एकजुट होकर समर्पण भाव से मैदान में उतरे," फडणवीस ने प्रशासनिक तंत्र से बेहद भावुक लेकिन कड़े शब्दों में यह अपील की।

इस साल राज्य में 'वॉटर कप' अभियान जल्दी शुरू हो रहा है। इसी पृष्ठभूमि में 'वर्षा' निवास पर एक बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील बैठक का आयोजन हुआ। राज्य को जल-समृद्ध बनाने के लिए दिन-रात जुटे मुख्यमंत्री फडणवीस इस दौरान बेहद भावुक, लेकिन उतने ही दृढ़ नजर आए।

संकट के समय सुबह से काम करने वाला मेरा तंत्र मुझे पता है

बैठक में अधिकारियों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने प्रशासन की क्षमता पर पूरा भरोसा जताया। उन्होंने कहा, "महाराष्ट्र पर जब-जब संकट आया, इसी प्रशासन ने सुबह से सड़कों पर उतरकर चमत्कार कर दिखाया है। सूखा सिर्फ प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि हमारी संवेदनशीलता की परीक्षा है। अगर हमारा तंत्र उत्साह और लगन से काम में जुट गया, तो कुछ भी असंभव नहीं है। पहले जिस तत्परता से आपने काम किया, उसी जिद के साथ अब जलसंधारण की पहल कीजिए।"

सिर्फ कागज पर प्रस्ताव तैयार करने के बजाय जमीन पर काम करने के साफ निर्देश देते हुए उन्होंने कहा कि बारिश की पहली बूंद गिरने से पहले ही जलसंधारण के सभी बांध, नाले और खंदक तैयार होने चाहिए। हर बूंद जमीन में समाएगी, तभी भूजल स्तर बढ़ेगा और मेरे किसान के चेहरे पर संतोष की मुस्कान आएगी।

तकनीक और लोक-भागीदारी का मजबूत साथ

मुख्यमंत्री की संवेदनशील सोच को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए एक विशेष कार्ययोजना बनाई गई है। कामों में पारदर्शिता रहे और प्रगति पर बारीकी से नजर रखी जा सके, इसके लिए तकनीक आधारित निगरानी प्रणाली (Technology-driven Monitoring System) विकसित करने के आदेश उन्होंने दिए। जिलाधिकारी, मुख्य कार्यकारी अधिकारी और कृषि विभाग के अधिकारी सीधे खेतों पर पहुंचकर पानी फाउंडेशन जैसी स्वयंसेवी संस्थाओं के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करें, इस पर उन्होंने जोर दिया।

"निराशा को आशा में बदलें": अभिनेता आमिर खान

इस अभियान में शुरू से मुख्यमंत्री के साथ काम कर रहे अभिनेता आमिर खान ने भी भावुक शब्दों में बात रखी। उन्होंने कहा, "यह साल चुनौती भरा है, लेकिन हमें निराशा को आशा में बदलना होगा। जनवरी से मई के बीच व्यापक जन-जागरूकता और किसान प्रशिक्षण अभियान चलाया जाएगा। मुख्यमंत्री की दूरदृष्टि का साथ देते हुए महाराष्ट्र के हर गांव की हर चौखट को इस जलपूजन में खुद को झोंक देना होगा।"

बैठक में नगरविकास राज्यमंत्री माधुरी मिसाळ, ए.टी.ई. चंद्रा फाउंडेशन के अमित चंद्रा, पानी फाउंडेशन के सत्यजित भटकळ, महसूल विभाग के अपर मुख्य सचिव विकास खारगे, वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव विकासचंद्र रस्तोगी, जलापूर्ति व स्वच्छता विभाग के अपर मुख्य सचिव पराग जैन-नैनुटिया, मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव लोकेश चंद्र, प्रधान सचिव डॉ. श्रीकर परदेशी, मृद व जलसंधारण विभाग के सचिव जितेंद्र पापळकर और जलसंपदा विभाग के प्रधान सचिव एकनाथ डवले के साथ राज्य के सभी जिलाधिकारी दूरदृश्य प्रणाली (वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग) के जरिए उपस्थित थे।