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महादेव ऐप आरोपी रायपुर कोर्ट में, ओमान की शर्तों पर छिड़ी जंग

महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क के कथित सरगना सौरभ चंद्राकर को मंगलवार शाम रायपुर लाया गया और बुधवार को विशेष सीबीआई अदालत में पेश किया जाएगा। उनके वकीलों का तर्क है कि ओमान ने सिर्फ मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रत्यर्पण मंजूर किया था, सीबीआई मामलों में नहीं।

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रायपुर: सौरभ चंद्राकर मंगलवार शाम छत्तीसगढ़ की राजधानी पहुंचे। सीबीआई की टीम उन्हें मस्कट से भारत लाई थी, और उससे करीब चार महीने पहले ओमान की रॉयल पुलिस ने उन्हें पकड़ा था।

करीब 6,000 करोड़ रुपये के कथित महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क की जांच कर रही सीबीआई बुधवार को उन्हें रायपुर की विशेष अदालत में पेश करेगी। दिल्ली की अदालत ने सोमवार को एजेंसी को दो दिन का ट्रांजिट रिमांड दिया था और प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश निखिल चोपड़ा ने निर्देश दिया था कि चंद्राकर को 4 नवंबर तक रायपुर में पेश किया जाए।

बचाव पक्ष ने दूसरा मोर्चा खोल दिया है। दिल्ली में वकीलों ने दलील दी कि ओमान ने प्रत्यर्पण की मंजूरी प्रवर्तन निदेशालय के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दी थी, सीबीआई के मामलों में नहीं। उनका कहना था कि उस दायरे से बाहर के अपराधों के लिए हिरासत मांगना प्रत्यर्पण की शर्तों का उल्लंघन होगा।

सीबीआई ने जवाब दिया कि रायपुर की विशेष अदालत पहले ही उनके खिलाफ खुला गैर-जमानती वारंट जारी कर चुकी है और ईडी तथा सीबीआई के मामले आपस में जुड़े हैं। एजेंसी ने कहा कि दिल्ली की अदालत को सिर्फ ट्रांजिट हिरासत तय करनी थी, प्रत्यर्पण के दायरे के सवाल रायपुर में देखे जा सकते हैं।

जांच के दायरे बढ़ने के साथ चंद्राकर फरार थे। जांचकर्ताओं के मुताबिक वे 2023 से दुबई में रह रहे थे और उनके खिलाफ इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस जारी था। आरोप है कि उन्होंने एजेंसियों से बचने के लिए फर्जी पहचान दस्तावेज इस्तेमाल किए, जिनमें अजंता मेंडिस नाम का कथित इंडोनेशियाई पासपोर्ट भी शामिल है। इसके बाद वे ओमान चले गए। ओमान की रॉयल पुलिस ने 8 जुलाई 2026 को उन्हें गिरफ्तार किया।

छत्तीसगढ़ सरकार ने ऐप से जुड़ी 13 एफआईआर सीबीआई को सौंपी हैं, जिनमें से दो में आरोपपत्र दाखिल हो चुके हैं। ईडी समानांतर रूप से मनी लॉन्ड्रिंग की जांच कर रहा है और उसने उनके खिलाफ अभियोजन शिकायत दाखिल की है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने गिरफ्तारी का स्वागत किया और कहा कि इससे संरक्षण राशि के कथित लेन-देन पर बड़े खुलासे हो सकते हैं। सीबीआई की एफआईआर में 21 लोगों के नाम हैं, जिनमें सरकारी अधिकारी और पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। दोनों एजेंसियों का आरोप है कि सरकारी कर्मचारियों को भुगतान किया गया ताकि संचालन चलता रहे।

फिलहाल रायपुर की अदालत के सामने सवाल हिरासत का है। एजेंसियों को किस मामले में और कितना पूछने का हक मिलेगा, वह बाद में तय होगा।