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Unacademy बिकने के दो महीने में ही मुंजाल-सैनी का 700 करोड़ का AI फंड; 25 से 28 स्टार्टअप्स को पैसा

Unacademy के संस्थापक गौरव मुंजाल और रोमन सैनी 'लॉन्गशॉट कैपिटल' नाम का 700 करोड़ रुपये का वेंचर कैपिटल फंड खड़ा कर रहे हैं। AI और डीप टेक पर केंद्रित इस फंड के लिए करीब 300 करोड़ की प्रतिबद्धता मिल चुकी है।

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मुंबई: Unacademy के संस्थापक गौरव मुंजाल और रोमन सैनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डीप टेक स्टार्टअप्स पर केंद्रित 700 करोड़ रुपये का वेंचर कैपिटल फंड खड़ा कर रहे हैं। मामले की जानकारी रखने वाले लोगों के मुताबिक यह कदम ऐसे समय उठाया जा रहा है, जब कंपनी के upGrad द्वारा अधिग्रहण को दो महीने भी नहीं हुए हैं।

'लॉन्गशॉट कैपिटल' नाम के इस फंड के लिए अब तक करीब 300 करोड़ रुपये की प्रतिबद्धता मिली है। जनवरी 2027 में पहला क्लोज़ करने और उसके बाद निवेश शुरू करने की योजना है। फंड जुटाने की बातचीत चल रही है और पहले क्लोज़ का आकार और समय बदल सकता है, ऐसा इन लोगों ने बताया।

फंड की कमान रोमन सैनी पूरे समय संभालेंगे, जबकि Unacademy का नेतृत्व जारी रखने वाले मुंजाल अंशकालिक जुड़े रहेंगे।

लॉन्गशॉट का लक्ष्य 25 से 28 सीड और प्री-सीरीज ए स्टार्टअप्स को पैसा देना है। शुरुआती चेक 5 लाख से 15 लाख डॉलर का होगा। क्षेत्र — AI, मैन्युफैक्चरिंग, अंतरिक्ष, रक्षा और रोबोटिक्स।

दोनों अब तक 200 से ज़्यादा एंजल निवेश कर चुके हैं और उनमें 25 करोड़ रुपये से ज़्यादा लगा चुके हैं। संस्थापकों का अपना फंड बनाना नया चलन नहीं है — स्नैपडील के कुणाल बहल और रोहित बंसल भी इसी तरह का निवेश फंड बना चुके हैं।

upGrad के Unacademy अधिग्रहण के लिए टर्म शीट पर हस्ताक्षर की घोषणा दोनों कंपनियों के संस्थापकों ने की थी। यह सौदा 100 फीसदी शेयर अदला-बदली का है और लेन-देन पूरा होने तथा नियामकीय फाइलिंग के बाद ही मूल्यांकन बताया जाएगा।

मुंजाल ने हाल में भारतीय वेंचर कैपिटलिस्ट्स पर हो रही आलोचना का जवाब दिया था। एक अमेरिकी टेक पत्रकार की पोस्ट पर जवाब में उन्होंने भारतीय निवेशकों के आकलन को "काफी पुराना" और "भड़काऊ" कहा था। उन्होंने एस्ट्रोटॉक, एयरबाउंड और सार्वम AI जैसी कंपनियों का उदाहरण दिया था।

यह फंड ऐसे समय आ रहा है, जब AI को लेकर उत्साह बढ़ा है। देश की आईटी सेवा कंपनियों की दूसरी तिमाही में AI से मिली कार्यक्षमता की वजह से ऑपरेटिंग मार्जिन बना रहने की बात सामने आई है।

निवेशकों के लिए एक चेतावनी भी है। पिछले छह दिनों की साइबर घटनाओं की कड़ी ने भारत के व्यक्तिगत डेटा संरक्षण कानून की खामियां उजागर की हैं। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने 3.75 लाख ग्राहकों का डेटा डार्क वेब पर लीक होने की बात कही थी और CERT-In ने चेताया था कि AI एजेंट बिना अनुमति भारतीय संस्थाओं के सिस्टम में घुसे हैं।

फंड का पहला क्लोज़ जनवरी में होने से असली निवेश उसके बाद ही शुरू होगा।