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3 विवादित गांवों में चुनाव की अधिसूचना से ओडिशा-आंध्र सीमा विवाद फिर भड़का

आंध्र प्रदेश ने कोरापुट जिले के विवादित कोटिया इलाके के तीन गांवों में पंचायत चुनाव की घोषणा की, जिससे दशकों पुराना ओडिशा-आंध्र सीमा विवाद फिर सुर्खियों में आ गया। मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।

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भुवनेश्वर : कोरापुट जिले के विवादित कोटिया इलाके के तीन गांवों में आंध्र प्रदेश द्वारा पंचायत चुनाव की घोषणा से दशकों पुराना ओडिशा-आंध्र सीमा विवाद फिर भड़क उठा है। मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है और दोनों राज्य इन गांवों पर अपना दावा करते हैं।

ओडिशा के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक पर आरोप लगाया कि वे भाजपा पर उंगली उठाने के बजाय अपनी पुरानी विफलताएं छिपाने की कोशिश कर रहे हैं। “कोटिया का मसला 21 गांवों का है; पहले की बीजू जनता दल सरकार की उपेक्षा से यह और पेचीदा हो गया,” पुजारी ने कहा। उन्होंने बताया कि पिछले दो साल में वे चार बार कोटिया गए और वहां विकास काम शुरू हुए हैं।

इससे पहले बीजू जनता दल के अध्यक्ष नवीन पटनायक ने मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी को पत्र लिखकर पूछा था कि आंध्र प्रदेश द्वारा चुनाव अधिसूचना जारी करने पर ओडिशा सरकार क्यों चुप है। उन्होंने यह भी कहा था कि भाजपा अपने एनडीए सहयोगी तेलुगू देसम पार्टी पर निर्भर है, इसलिए यह चुप्पी है।

पुजारी ने पटनायक के पत्र को सिर्फ “दिखावा” कहा। कोटिया ग्राम पंचायत के 28 में से 21 गांवों पर दोनों राज्य दावा करते हैं। ओडिशा ने जनवरी 2022 में सुप्रीम कोर्ट में नई याचिका दायर की थी, जो अब भी विचाराधीन है। अधिसूचना से दोनों राज्यों का राजनीतिक माहौल गरमा गया है।

कोटिया को लेकर यह विवाद दशकों पुराना है। दोनों राज्य इस इलाके में अपनी प्रशासनिक मौजूदगी दिखाते आए हैं। ओडिशा ने वहां विकास कार्य कराए हैं, तो आंध्र प्रदेश ने भी अपने दावे बनाए रखे हैं। इन विवादित गांवों के लोगों के लिए जमीन के रिकॉर्ड, कल्याणकारी योजनाएं और किसके अधिकारी दरवाजे पर आते हैं, यही सबसे बड़े सवाल हैं। ओडिशा की सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका अब भी लंबित है, इसलिए कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है।