मुख्य सामग्री पर जाएं
मुख्यमंत्रीमुख्यमंत्री
अपराधकेरल

मर्सिडीज हादसे में जज पर केस; नाबालिग के बदले वाहन मालिक के तौर पर कार्रवाई

चेरनल्लूर में नाबालिग के ड्राइविंग वाली मर्सिडीज ने स्कूटर सवार 55 वर्षीय दुकानदार की जान ली। पुलिस ने वाहन के मालिक अतिरिक्त जिला जज को आरोपी बनाया। केरल हाई कोर्ट ने जज के खिलाफ केस दर्ज करने की अनुमति दी और परिवार के आरोपों की जांच के लिए SIT बनाई गई।

· · 2 मिनट में पढ़ें

कोची: चेरनल्लूर में नाबालिग के ड्राइविंग वाली मर्सिडीज ने स्कूटर सवार 55 वर्षीय दुकानदार की जान ले ली। सोमवार को कोची पुलिस ने गाड़ी के रजिस्टर्ड मालिक अतिरिक्त जिला जज को आरोपी बना दिया।

थ्रिसूर जिले की इरिंजालकुडा अदालत में तैनात जज के खिलाफ मोटर वाहन अधिनियम की धारा 199A के तहत केस दर्ज हुआ है। इस धारा में कहा गया है कि अगर किसी नाबालिग ने अपराध किया है तो नाबालिग का अभिभावक या वाहन का मालिक दोषी माना जाएगा और उस पर कार्रवाई होगी।

"जज के खिलाफ केस दर्ज करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट की जो गाइडलाइन लागू होती हैं, उनका पालन किया जा रहा है। जिला न्यायपालिका और हाई कोर्ट को सूचित करना होगा," कोची सिटी के पुलिस आयुक्त एस. कालिराज महेश कुमार ने बताया।

रविवार तड़के करीब 2.20 बजे कंटेनर रोड पर मरपारांबू में यह हादसा हुआ। साउथ चित्तूर के रहने वाले जयबालकृष्णन (55) अपना खाने का ठेला बंद कर स्कूटर से घर लौट रहे थे। उनके स्कूटर को पीछे से मर्सिडीज ने टक्कर मारी और उनकी मौके पर मौत हो गई। तीन बच्चों का भरण-पोषण उन्हीं पर था और 30 साल से वे ठेला चला रहे थे।

पहले पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 106(1) के तहत लापरवाही से मौत का केस दर्ज किया और नाबालिग को किशोर न्याय अधिनियम की धारा 8 के तहत थाने से ही जमानत दे दी। इससे चेरनल्लूर थाने के बाहर विरोध शुरू हो गया। मृतक के बेटे और बेटी ने कार्यकर्ताओं के साथ आरोपी को हिरासत में लेकर किशोर न्याय बोर्ड के सामने पेश करने की मांग की। विरोध के दौरान मृतक की बेटी बेहोश हो गई और उसे अस्पताल ले जाना पड़ा।

इसके बाद पुलिस ने धारा 105 (गैर-इरादतन हत्या) जोड़ी। पुलिस के मुताबिक प्राथमिक जांच में पता चला कि गाड़ी बहुत तेज रफ्तार से चलाई जा रही थी और पहले भी इसी तरह चलाई गई थी। देर रात पुलिस जज के आवास पहुंची, लड़के को हिरासत में लिया और किशोर न्याय बोर्ड के सामने पेश किया, जिसने पिछला आपराधिक रिकॉर्ड न होने के आधार पर जमानत दे दी।

सोमवार को केरल हाई कोर्ट ने सेवारत जज के खिलाफ केस दर्ज करने की पुलिस को अनुमति दी। सेवारत जज के खिलाफ सीधे एफआईआर दर्ज नहीं हो सकती; इसके लिए हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को लिखित आवेदन देना पड़ता है।

इस बीच मृतक के परिवार के आरोपों की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) बनाया गया है। परिवार का आरोप है कि हादसे के वक्त गाड़ी में तीन और लोग थे और वे मौके से भाग गए। नाबालिग का दावा है कि उसने पहली बार गाड़ी चलाई थी, लेकिन परिवार का आरोप है कि उसके इंस्टाग्राम अकाउंट पर तेज रफ्तार ड्राइविंग के रील्स थे, जो हादसे के बाद हटा दिए गए। पुलिस ने बताया कि हादसे के वक्त रफ्तार 104 किलोमीटर प्रति घंटा थी।

नाबालिग का नाम नहीं छापा गया है। सभी आरोपों की अदालती जांच बाकी है।

इस हादसे से तीन हफ्ते पहले, 11 अक्टूबर को कोची में ऐसी ही घटना हुई थी, जिसमें 19 वर्षीय युवक द्वारा तेज रफ्तार से चलाई गई मिनी कूपर ने तीन युवकों की जान ली थी।