तिरुवनंतपुरम: पुनर्गठित राज्य वक्फ बोर्ड में अपना प्रतिनिधित्व न मिलने पर कांथापुरम गुट की आपत्ति पर सभी मुस्लिम समूहों के बीच सहमति बनने का दावा अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री एन. संसुद्दीन ने किया है। हालांकि उन्होंने ब्योरा नहीं खोला।
कांथापुरम ए.पी. अबूबकर मुसलियार के नेतृत्व वाले समस्था केरल जम-इय्यथुल उलमा गुट ने वक्फ बोर्ड में जगह न मिलने पर आपत्ति जताई थी। मंत्री ने कहा कि सामान्य श्रेणी में केवल दो-तीन पद थे, इसलिए सभी समूहों को शामिल करना संभव नहीं था।
पिछले शुक्रवार सरकार ने के.एस. हमसा की अध्यक्षता वाले वक्फ बोर्ड को भंग कर नौ सदस्यीय नया बोर्ड बनाया। पुराने बोर्ड का कार्यकाल चार साल से अधिक शेष था। नए बोर्ड के अध्यक्ष आईयूएमएल के एम.सी. मयीन हाजी हैं।
आईयूएमएल के प्रदेश अध्यक्ष सय्यद सादिक अली शिहाब थंगल ने विभिन्न मुस्लिम समूहों के नेताओं की बैठक बुलाई थी। मंत्री ने कहा कि बोर्ड का पुनर्गठन कानून के मुताबिक किया गया, इसलिए केरल उच्च न्यायालय ने हस्तक्षेप नहीं किया।
बोर्ड में जगह न पाने वालों को अल्पसंख्यक कल्याण और हज संबंधी समितियों में मौका देने पर विचार है। यह रुख विभाग, पार्टी और यूडीएफ का है, ऐसा संसुद्दीन ने कहा।
नए बोर्ड के अध्यक्ष आईयूएमएल के एम.सी. मयीन हाजी हैं। अन्य सदस्यों में आईयूएमएल नेता और विधायक कुरुक्कोली मोइदीन, मुस्तफा फैजी, सिरास डी. कैप्सी, तोडियूर मुहम्मद कुंजू मौलवी, सजना फिरोज, जसीम सबाहा, डॉ. अब्दुल मजीद स्वलाही और सी. मदीना बेगम शामिल हैं।
मंत्री ने कहा कि बोर्ड में शामिल न हो पाने वालों को अल्पसंख्यक कल्याण और हज संबंधी समितियों में जगह दी जाएगी, और यह रुख विभाग, पार्टी तथा यूडीएफ का है।
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वक्फ बोर्ड में सबको जगह नहीं, पर विवाद खत्म; केरल सरकार का दावा
पुनर्गठित राज्य वक्फ बोर्ड में प्रतिनिधित्व न मिलने पर कांथापुरम गुट के आपत्ति पर सहमति बनने का दावा अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री एन. संसुद्दीन ने किया। जो बोर्ड में नहीं आ पाए, उन्हें अन्य समितियों में मौका मिलेगा।
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