तिरुवनंतपुरम: केरल ने देश के मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ रिश्वत के आरोपों की जांच अपने भ्रष्टाचार निरोधक विभाग को सौंपी है। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि इसी मामले की पुरानी जांच बिना केस दर्ज किए कैसे बंद कर दी गई थी। गृह मंत्री रमेश चेन्निथला के इस निर्देश की पुष्टि बुधवार को हुई। विपक्ष लगातार चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण का विरोध कर रहा है।
शिकायत कोल्लम जिले के पूर्व ठेकेदार साजन ने की है। उन्होंने विजिलेंस डायरेक्टर को बताया है कि 2000 के दशक के मध्य में केरल के लोक निर्माण विभाग के सचिव रहे ज्ञानेश कुमार ने केरल राज्य परिवहन परियोजना के तहत पूरा हो चुके काम का भुगतान जारी करने के लिए 2 करोड़ रुपये की मांग की थी।
साजन का आरोप है कि इंजीनियरों से मंजूर करीब 17 करोड़ रुपये के बिलों के चेक रोक लिए गए। यह काम मलेशियाई कंपनी पाटी-बेल का कंसोर्टियम कर रहा था और देरी से उसके ठेकेदारों और मजदूरों के पास पैसा नहीं पहुंचा। शिकायत के मुताबिक कंपनी के प्रोजेक्ट इंजीनियर और मलेशियाई नागरिक ली सी बीन ने उन्हें बताया था कि रकम दिए बिना चेक नहीं मिलेंगे।
शिकायत में साजन ने कहा है, "जब मैंने सुझाव दिया कि कुछ देकर मामला निपटा दें, तो उन्होंने कहा कि पाटी-बेल के अधिकारी रिश्वत देकर चेक लेने की इजाजत नहीं दे रहे।"
उनका यह भी आरोप है कि ली ने बेंगलुरु की दूसरी परियोजना से पैसा लेकर ठेकेदारों और मजदूरों का कुछ बकाया चुकाया, और रुके हुए बिलों तथा कथित मांग ने 2006 में उनकी खुदकुशी में भूमिका निभाई। साजन के मुताबिक ली ने सुसाइड नोट में कुमार का नाम लिखा था, जिसकी जानकारी बाद में मलेशिया में उनके परिवार ने कंपनी के कर्मचारियों को दी।
2006 में ली की मौत के बाद विजिलेंस जांच शुरू हुई थी, लेकिन आरोप साबित न होने पर वह बंद कर दी गई। साजन की शिकायत कहती है कि पुरानी जांच में उनसे या सीधी जानकारी रखने वालों से पूछताछ ही नहीं हुई। वह ली के परिवार और पूर्व सहकर्मियों को गवाह के तौर पर पेश करने की पेशकश कर रहे हैं।
नई शिकायत उसी विजिलेंस टीम के पास जाएगी जो परिवहन परियोजना की प्रारंभिक जांच कर रही है। यह जांच चेन्निथला ने 4 अक्टूबर को कांग्रेस नेता मलयिंकीझु वेणुगोपाल की शिकायत पर शुरू कराई थी। मामला एमसी रोड के उन्नयन से जुड़ा है, जिसका काम पाटी-बेल कंसोर्टियम ने किया।
सभी आरोप अभी साबित नहीं हुए हैं। कुमार की ओर से इन पर कोई जवाब नहीं आया है। ब्यूरो फिलहाल प्रारंभिक जांच करेगा, केस दर्ज करने के लिए गृह विभाग की मंजूरी चाहिए होगी।