तिरुवनंतपुरम : केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूडीएफ सरकार ने 140 में से 102 सीटें जीतकर सत्ता संभालने के पांच महीने के भीतर ही पार्टी के भीतर मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। मुख्यमंत्री वी.डी. सत्तेसन के काम करने के तरीके और कुछ फैसलों पर पार्टी के कई नेता नाराजगी जता रहे हैं।
सत्तेसन की दोस्तों द्वारा प्रायोजित हेलीकॉप्टर यात्रा विवाद में आने के बाद गृह मंत्री रमेश चेन्निथला और कुछ मंत्रियों के विदेश दौरे भी चर्चा में आए। स्थानीय स्वराज्य मंत्री के.एम. शाजी (इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग) के ऑस्ट्रिया, बुल्गारिया, स्विट्जरलैंड और यूएई दौरे में एक शराब कारखाने के मालिक और बिल्डर के शामिल होने का आरोप सोशल मीडिया पर लगा।
सीएमआरएल-एक्सालॉजिक भ्रष्टाचार मामले में पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन और उनके परिवार के खिलाफ 'नरम' रुख अपनाने का आरोप सरकार पर लगा। 16 अक्टूबर को कांग्रेस विधायक मैथ्यू कुझलनाडन ने मुख्यमंत्री से तीखी बहस के बाद बैठक छोड़ दी। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. सुधाकरन और यूडीएफ संयोजक अदूर प्रकाश ने भी सरकार के रुख पर सवाल उठाए। “अगर सरकार मजबूत है तो पिनराई पर कार्रवाई करे,” सुधाकरन ने कहा।
स्वास्थ्य मंत्री के. मुरलीधरन ने मुख्यमंत्री का बचाव करते हुए कहा कि सरकार ने कानूनी कदम उठाए हैं। वहीं प्रदेश कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के इस्तीफे की मांग वाली सोशल मीडिया पोस्ट हटाने के बाद अपना सोशल मीडिया विभाग ही भंग कर दिया। पार्टी ने सार्वजनिक बयानों में संयम रखने का निर्देश दिया है।
केरल में यूडीएफ सरकार की शुरुआत उम्मीद भरी मानी गई थी, लेकिन भीतरी मतभेदों से इसकी छवि कमजोर पड़ रही है, ऐसा पर्यवेक्षकों का मानना है। कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुधाकरन और विधायक कुझलनाडन जैसे नेताओं ने सरकार के रुख के खिलाफ आवाज उठाई है। विरोध से नहीं, बल्कि सरकार के भीतर से इसकी छवि को झटका लग रहा है।