तिरुवनंतपुरम: केरल लोक सेवा आयोग का विवाद अब पद छोड़ते वक्त लिखे गए एक पत्र पर टिका है। इस महीने तमिलनाडु जाने से पहले राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से सिफारिश की थी कि PSC अध्यक्ष एम. आर. बैजू और दूसरे सदस्यों को हटाया जाए और पूरा आयोग भंग कर दिया जाए। लोक भवन के सूत्रों ने अध्यक्ष को हटाने की सिफारिश की पुष्टि की है।
अर्लेकर 22 अक्टूबर को केरल से चले गए। 23 अक्टूबर को ओम प्रकाश माथुर ने पदभार संभाला। अध्यक्ष से संपर्क नहीं हो सका।
नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने इसे "अवैध" और संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन कहा। उन्होंने कहा, "PSC सदस्यों की नियुक्ति अनुच्छेद 316 के तहत छह साल के लिए होती है। उन्हें हटाने की प्रक्रिया अनुच्छेद 317 में तय है।" अनुच्छेद 317 के मुताबिक आरोप सुप्रीम कोर्ट के पास जांच के लिए जाते हैं और कोर्ट की रिपोर्ट के बाद ही राष्ट्रपति हटाने का आदेश दे सकते हैं। विजयन ने कहा, "केरल PSC के मामले में ऐसी प्रक्रिया नहीं हुई। इसलिए राज्यपाल को ऐसी सिफारिश का अधिकार नहीं था।"
राजस्व मंत्री ए. पी. अनिल कुमार ने भी यही रुख लिया, लेकिन आयोग से दूरी बनाए रखी। उन्होंने कहा, "सरकार को बताए बिना और भरोसे में लिए बिना राष्ट्रपति को सिफारिश करना गंभीर चिंता की बात है। साथ ही परीक्षा से जुड़े आरोपों का सामना कर रहे PSC अध्यक्ष और सदस्यों का बचाव भी मैं नहीं करता।"
BJP के प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने इसे उलटा पढ़ा। उन्होंने कहा कि यह सिफारिश कांग्रेस सरकार के लिए "बड़ा झटका" है, जो PSC में CPI(M) के कथित गोरखधंधों को बचाने की कोशिश कर रही थी।
आयोग पर पिछली CPI(M) सरकार के दौरान हुई भर्तियों में अनियमितता के आरोप लगे हैं। राज्य अपराध शाखा राज्य योजना बोर्ड के एक अहम पद की भर्ती में कथित गड़बड़ी की जांच कर रही है। जून 2026 में आयोग की आंतरिक जांच में मूल्यांकन प्रक्रिया में गंभीर चूक मिली थी, जिसका कथित फायदा CPI(M) से जुड़े उम्मीदवार को मिला। इसके बाद ABVP और BJYM समेत कई संगठनों ने राज्यपाल से अध्यक्ष और सदस्यों को हटाने की मांग की।
एक हफ्ते के अंतराल के बाद सोमवार से विधानसभा फिर बैठेगी। अनुपूरक अनुदान मांगों पर चर्चा और मतदान मुख्य एजेंडा है। सत्र 29 अक्टूबर तक चलेगा। राज्यपाल की कार्रवाई पर मंत्रियों के ही अलग-अलग बयान आए हैं, जिसे विपक्ष हथियार बनाएगा। सबकी नजर मुख्यमंत्री के रुख पर है।