तिरुवनंतपुरम: मंत्री ए. पी. अनिलकुमार को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाने की कोशिश पर मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन ने साफ नाराज़गी जताई है। उनके करीबी लोगों के मुताबिक, यह संगठन की ज़रूरत से ज़्यादा एक गुट की मांग है।
प्रस्ताव एआईसीसी महासचिव के. सी. वेणुगोपाल के करीबी दायरे से आया है। अनिलकुमार वेणुगोपाल के भरोसेमंद माने जाते हैं और उन्होंने पद लेने में दिलचस्पी दिखाई है। अगर ऐसा होता है तो सरकार बनने के छह महीने के भीतर ही मंत्रिमंडल बदलना पड़ेगा।
सतीशन का विरोध दो स्तरों पर है। पहला, कार्यकाल की शुरुआत में मंत्रिमंडल में हेरफेर वे नहीं चाहते। दूसरा, उन्हें लगता है कि अध्यक्ष पद की मांग एक धड़े ने दूसरे नेताओं का रास्ता रोकने के लिए उठाई है। इस मांग के पीछे कुछ लोगों की मंत्री बनने की महत्वाकांक्षा है, ऐसा मुख्यमंत्री के करीबी सूत्र बताते हैं।
उन्होंने विकल्प भी सामने रखा है। अगर अध्यक्ष पद किसी दलित नेता को देना है तो अनिलकुमार की जगह कोडिकुन्नील सुरेश जैसे वरिष्ठ नेता का नाम उन्हें ठीक लगता है।
मुख्यमंत्री अकेले नहीं हैं। मंत्री रमेश चेन्निथला जोसेफ वाझक्कन का पक्ष ले रहे हैं। यानी एक ही मंत्रिमंडल के दो वरिष्ठ नेता एक ही नाम के खिलाफ खड़े हैं।
अनिलकुमार ने दरवाज़ा बंद नहीं किया है। पार्टी जहां कहेगी वहां जाऊंगा, ऐसी बात उन्होंने कही है। इसका मतलब है कि फैसला राज्य इकाई के बजाय केंद्रीय नेतृत्व के हाथ में रहेगा।
केरल की कांग्रेस के लिए यह टकराव मुश्किल वक्त में आया है। सरकार के पहले साल में ही पंचायत और स्थानीय निकाय चुनावों के लिए संगठन खड़ा करना है। जब अपने ही मंत्री एक नाम पर सहमत नहीं हो पा रहे, तो माकपा के नेतृत्व वाली लेफ्ट फ्रंट को हमला करने का आसान मौका मिल जाता है।
आधिकारिक तौर पर अभी कुछ तय नहीं हुआ है। एआईसीसी ने किसी नाम की घोषणा नहीं की और मुख्यमंत्री कार्यालय ने भी कोई बयान नहीं दिया है। फैसला केंद्रीय नेतृत्व के हाथ में है।